उत्तरांचल पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के इंजीनियर राहुल चन्ना से प्राप्त जानकारी के आधार पर कामगार एकता कमिटी संवाददाता की रिपोर्ट

उत्तराखंड बिजली क्षेत्र के इंजीनियरों ने 24 जून से उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के व्यवस्थापन की अनुचित नीति के खिलाफ अपना आंदोलन शुरू कर दिया है। विरोध जताने के लिए उन्होंने पूरे उत्तराखंड में गेट मीटिंग्स कीं और विरोध के तौर पर काली पट्टी बांधकर अपनी ड्यूटी भी की।
उत्तरांचल पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के महासचिव ने बताया कि इंजीनियरों के पदोन्नति की प्रक्रिया को जानबूझकर रोककर रखा गया है, जबकि सेवानिवृत होने वाले इंजीनियरों को सेवा समय में वृद्धि दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत होने वाले कर्मचारियों को सेवा समय में वृद्धि मिलने की वजह से, अभी काम कर रहे कुछ कर्मचारियों को पदोन्नति के मौके नहीं मिल पाएंगे और वे अपने मौजूदा ग्रेड में ही सेवानिवृत हो जाएंगे।
उत्तरांचल पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन मांग कर रही है कि 30 जून के बाद ऐसी समय-सीमा न बढ़ाई जाए, वरना उन्हें अपना आंदोलन और तेज़ करना पड़ेगा। उन्होंने यह भी बताया कि ऐसा तब किया जा रहा है, जबकि 26 जुलाई 2025 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में निगम ने पदोन्नति की प्रक्रिया में तेज़ी लाने पर सहमति जताई थी।
यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि देश भर में राज्य बिजली कंपनियाँ पदोन्नति के मौक़े टालने या न देने और खाली पदों को भरने के लिए सालों तक भर्ती में देरी करने जैसी नीतियाँ अपना रही हैं। ऐसा बिजली क्षेत्र के निजीकरण के ख़िलाफ़ बिजली कर्मचारियों के बढ़ते विरोध को दबाने और कमज़ोर करने के लिए किया जा रहा है। बिजली क्षेत्र के सभी कर्मचारियों को एकजुट होकर ऐसी नीतियों को तुरंत रोकने की मांग करनी चाहिए।
