कामगार एकता कमिटी के संवाददाता की रिपोर्ट

बेस्ट (बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग) मुंबई शहर और उपनगरों के लिए शहर की परिवहन सेवा है। इसे बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) द्वारा चलाया जाता है। यह शहर और इसके उपनगरों के लोगों के लिए परिवहन का एक महत्वपूर्ण साधन है। परंतु, बीएमसी इस का निजीकरण करने के लिए एक के बाद एक कदम उठा रहा है।
बस सेवाओं में कटौती की गई है, जबकि शहर और उसकी आबादी की वृद्धि को देखते हुए इसके विस्तार की आवश्यकता है। 2011 में, बेस्ट के पास लगभग 4,700 बसों का अपना बेड़ा था। इस बेड़े का उपयोग करके यह प्रतिदिन 42-45 लाख यात्रियों को परिवहन की सुविधा देता था। आज बढ़ी हुई आवश्यकता को पूरा करने के लिए 12,000 बसों के बेड़े की आवश्यकता है। लेकिन, बेस्ट आज केवल लगभग 2800 बसें संचालित करता है। परिणामस्वरूप, अब प्रतिदिन केवल लगभग 25 लाख लोग बेस्ट बसों का उपयोग कर सकते हैं। इन 2800 बसों में से बेस्ट की मालिकी की केवल लगभग 250 बसें हैं। बेस्ट ने बाकी बसें निजी बस मालिकों से वेट लीज पर किराए पर ली हैं। (वेट लीज के तहत, बस को चालक के साथ एक शुल्क पर बेस्ट को लीज पर दिया जाता है।)
बेस्ट का निजीकरण और विनाश करने की एक और चाल में, बीएमसी ने 22 बस डिपो (लगभग 126 हेक्टेयर) की जमीन का मुद्रीकरण करने का फैसला किया है। इन डिपो का इस्तेमाल बसों के परिचालन में न होने पर उन्हें खड़ा करने और बसों के रखरखाव के लिए किया जाता है। जिन जमीनों पर ये डिपो स्थित हैं, वे बहुत मूल्यवान हैं। योजना है कि इस जमीन को “पुनर्विकास” के लिए लंबी लीज़ पर सौंप दिया जाए। इसमें वाणिज्यिक रियल एस्टेट और कुछ “सामाजिक बुनियादी ढाँचा” जैसे स्कूल, अस्पताल, कला संग्रहालय, थिएटर, खेल केंद्र और सांस्कृतिक केंद्र शामिल होंगे। इसके अतिरिक्त, 36,000 कारों के लिए “सार्वजनिक पार्किंग” सुविधाएँ बनाई जाएँगी।
कुछ रिपोर्टों के अनुसार, 126 हेक्टेयर भूमि से 5,000 – 6,000 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो सकता है। अप्रैल 2023 में, बेस्ट ने घोषणा की थी कि वह अपने डिपो का मुद्रीकरण करने के लिए विश्व बैंक की एक शाखा, इंटरनेशनल फाइनेंस कॉरपोरेशन से सहायता लेगा।
सरकार यह कहकर लोगों को बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रही है कि भूमि का स्वामित्व बेस्ट के पास ही रहेगा, और डिपो को लीज़ पर दिया जा रहा है, तथा इन जमीनों पर स्कूलों, अस्पतालों आदि जैसे “सामाजिक बुनियादी ढाँचे” का निर्माण किया जाएगा। मुंबई के नागरिक जानते हैं कि यह सब महज दिखावा है: सरकार जमीन बिल्डरों और रियल एस्टेट विकासकों को सौंप रही है, जो इस जमीन से अधिकतम मुनाफा कमाएंगे।
यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि टाटा, अडानी, गोदरेज, बिड़ला जैसे बड़े इजारेदार कॉरपोरेट समूह लोढ़ा, हीरानंदानी, रहेजा, ओबेरॉय जैसे बिल्डर कॉरपोरेट्स के साथ मुंबई में रियल एस्टेट विकास के क्षेत्र में प्रवेश कर चुके हैं। वे हर सरकारी जमीन पर नजर गड़ाए हुए हैं, चाहे उसका इस्तेमाल बंदरगाह, रेलवे, बीएमसी द्वारा किया जाता हो, ताकि रियल एस्टेट विकसित करके मुनाफा कमाया जा सके।
पिछले कुछ दशकों में, महाराष्ट्र की सभी प्रमुख पूंजीवादी पार्टियों ने किसी न किसी समय बीएमसी को चलाया है। उन सभी ने पहले संचालन और विस्तार के लिए धन की कमी पैदा करके बेस्ट के निजीकरण को आगे बढ़ाया है। वेट लीजिंग के माध्यम से निजीकरण को उचित ठहराने के लिए पुरानी हो चुकी बसों को बदला नहीं गया।
एक बार डिपो का मुद्रीकरण हो जाने के बाद, बेस्ट के पास अपनी बसों को खड़ा करने और उनका रखरखाव करने के लिए कोई जगह उपलब्ध नहीं होगी। इसके बाद इसका इस्तेमाल मुंबई में बेस्ट की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को पूरी तरह नष्ट करने को उचित ठहराने के लिए किया जाएगा।
बेस्ट की जमीन का मुद्रीकरण बेस्ट को उसके संकट से बचाने का कोई साधन नहीं है, जैसा कि दावा किया गया है। इसके विपरीत, बेस्ट में संकट पैदा किया गया है, और जमीन के मुद्रीकरण तथा बेस्ट के पूर्ण निजीकरण की पृष्टभूमि तैयार करने के लिए बस व्यवस्था को व्यवस्थित रूप से नष्ट किया गया है।
20 से अधिक संगठन ‘आमची मुंबई आमची बेस्ट’ (हमारी मुंबई हमारी बेस्ट) के बैनर तले बेस्ट के निजीकरण और उसकी जमीन के मुद्रीकरण का विरोध करने के लिए एकजुट हुए हैं। उन्होंने निजीकरण को वापस लेने और मुंबई शहर में सार्वजनिक सड़क परिवहन को बेहतर बनाने की मांग को लेकर कई विरोध प्रदर्शन किए हैं।
उन्होंने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
- बेस्ट की ज़मीन निजी खिलाड़ियों को सौंपने के प्रस्ताव को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।
- वेट-लीज़ प्रणाली को तुरंत समाप्त किया जाना चाहिए।
- बेस्ट को अपने स्वामित्व और संचालन वाली बसों के बेड़े को बढ़ाकर कम से कम 10,000 बसें करना चाहिए।
- बीएमसी को बेस्ट के कुशल संचालन और उसके घाटे को चुकाने के लिए धन की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।
कामगार एकता कमिटी (केइसी) मुंबई के मेहनतकश लोगों के बेस्ट के निजीकरण के खिलाफ संघर्ष का पूरी तरह समर्थन करती है। केइसी मांग करती है कि बीएमसी सार्वजनिक परिवहन में अपना निवेश बढ़ाए ताकि मुंबई के मेहनतकश लोगों के लिए स्थानीय यात्रा सस्ती और आरामदायक हो सके।
