कामगार एकता कमिटी संवाददाता की रिपोर्ट

मंगलवार, 22 सितंबर को AIIMS जोधपुर के एनेस्थीसिया विभाग में पोस्टग्रेजुएट निवासी डॉक्टर डॉ. राज नरेश यादव की संदिग्ध आत्महत्या से मौत हो गई। उनका शव उनके विभाग के विश्राम गृह से जुड़े शौचालय में मिला।
इस घटना के बाद, निवासी डॉक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। उन्होंने काम के माहौल में बहुत ज़्यादा तनाव, लंबे समय तक काम करने और बीमार होने के बावजूद छुट्टी न मिलने जैसी समस्याओं पर चिंता जताई।
विरोध कर रहे डॉक्टर काम की स्थितियों में व्यवस्थित सुधार, प्रशासन की जवाबदेही, संस्थान के कार्यकारी निदेशक के इस्तीफे और पीड़ित परिवार के लिए मुआवज़े की मांग कर रहे हैं।
मांग पत्र नीचे दिया गया है।
संस्थान ने घोषणा की कि शिकायतों की जांच के लिए एक समिति गठित की गई है और निवासी डॉक्टरों के प्रतिनिधियों से अपने सुझाव प्रस्तुत करने का अनुरोध किया।
डॉक्टरों के अनुसार, गुरुवार, 24 सितंबर को एक शोक सभा आयोजित की गई, जहां एक संकाय दल ने प्रदर्शन कर रहे निवासी डॉक्टरों के साथ बातचीत की और ड्यूटी के घंटों को लेकर उनकी चिंताओं पर सहमति जताई। हालांकि, निवासी डॉक्टर अपनी अन्य मांगों पर अडिग रहे।


अंग्रेजी पत्र का अनुवाद
24-09-2026 RDAAJ/2026/09/00003
सेवा में
कार्यकारी निदेशक
एम्स जोधपुर
विषय– निवासियों और छात्रों के लिए प्रणालीगत सुधारों की मांग करने वाला अभ्यावेदन
आदरणीय महोदय,
22 सितंबर 2026 को हुई दुखद घटना के संबंध में हमारे पहले दिए गए ज्ञापन के क्रम में, हम सादर निम्नलिखित अनुरोध आपकी कृपापूर्ण समीक्षा के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं। ये उपाय व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं को दूर करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने में सहायक हो सकते हैं।
1. मुख्य और अनिवार्य मांगें वही बनी हुई हैं और उन्हें प्राथमिकता दी जा रही है।
- सार्वजनिक माफ़ी
- मृतक के परिवार को मुआवजा
- निदेशक का इस्तीफ़ा
2. रेज़िडेंट ड्यूटी घंटों का सख्त नियमन
सभी निवासी के कार्य घंटे और ड्यूटी शेड्यूल सख्ती से 12 घंटे से अधिक नहीं होने चाहिए, जिसमें अनिवार्य विश्राम और ड्यूटी के बाद स्वास्थ्य लाभ के लिए पर्याप्त प्रावधान हों। ड्यूटी आवंटन की किसी भी प्रणाली को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि निवासी को अत्यधिक या असुरक्षित कार्य घंटों के अधीन न किया जाए।
3. कार्यबल में वृद्धि
अभी समय की मांग है कि अस्पताल में काम करने वाले रेजिडेंट्स और सहायक कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जाए, ताकि सभी मरीज़ों का कुशलतापूर्वक प्रबंधन किया जा सके।
4. ओपीडी के समय और काम के बोझ का नियमन
प्रत्येक विभाग में ओपीडी मरीजों की संख्या पर एक तर्कसंगत और लागू करने योग्य सीमा निर्धारित की जानी चाहिए, जिसमें संबंधित ओपीडी में तैनात रेजिडेंट्स की संख्या, मरीजों की जटिलता और रेजिडेंट्स के साथ ओपीडी कक्ष में उपलब्ध पर्यवेक्षण करने वाले फैकल्टी को ध्यान में रखा जाए; साथ ही ओपीडी ड्यूटी के घंटों के दौरान उचित लंच समय और निर्धारित लंच रूम के साथ निश्चित ओपीडी समय भी होना चाहिए।
5. इलेक्टिव शल्य-चिकित्सा कक्ष के समय में बदलाव और शनिवार को शैक्षणिक दिवस के तौर पर तय करना
- सोमवार से शुक्रवार: वैकल्पिक OT के लिए सुबह 9:00 बजे 4:00 बजे तक
- शनिवार, रविवार और राजपत्रित छुट्टियाँ: कोई नियमित वैकल्पिक नहीं
आपातकालीन और अत्यावश्यक ऑपरेटिव सेवाएँ स्थापित आपातकालीन शिष्टाचार के अनुसार जारी रहनी चाहिए।
- सभी विभागों के लिए शनिवार का उपयोग शैक्षणिक दिवस के रूप में किया जाना चाहिए।
6. निवासी चिकित्सकों और छात्र की सुरक्षा, काम करने की स्थितियों और मानसिक स्वास्थ्य की नियमित समीक्षा।
संस्थान को निवासी चिकित्सकों के ड्यूटी घंटों, कार्यभार, स्टाफिंग, विश्राम सुविधाओं, आपातकालीन तैयारी और व्यावसायिक सुरक्षा का समय-समय पर ऑडिट करना चाहिए, तथा जहाँ भी कमियाँ पाई जाएँ वहाँ सुधारात्मक उपाय लागू किए जाने चाहिए।
7. चुनिंदा और आपातकालीन शल्य-चिकित्सा कक्ष के लिए मामलों का उचित चयन
केस को सही तरीके से शल्य-चिकित्सा कक्ष में योजनाबद्ध किया जाना चाहिए। आपातकालीन शल्य-चिकित्सा कक्ष में कोई भी ‘इलेक्टिव केस‘ (पहले से तय सर्जरी) नहीं लिया जाना चाहिए, ताकि काम सुचारू रूप से चले और रेजिडेंट्स पर काम का बोझ सही बना रहे।
8. पारदर्शी और एकसमान छुट्टी नीति
छुट्टी एक आसान और पूरी तरह से ऑनलाइन प्रक्रिया के ज़रिए दी जाएगी, जो सभी निवासियों पर समान रूप से लागू होगी; और किसी भी निवासी को आपात स्थिति या बीमारी की स्थिति में छुट्टी देने से मना नहीं किया जाएगा।
9. आपातकालीन, ओपीडी और आईपीडी क्षेत्र के पास रहने वालों के लिए खास पार्किंग की जगह।
रेसिडेंट्स को अस्पताल के अन्य कर्मचारियों से अलग, उनके लिए खास पार्किंग की जगह दी जानी चाहिए।
10. छात्र कल्याण
डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर के कार्यालय का पुनर्गठन कर इसे छात्र कल्याण कार्यालय बनाया जाना चाहिए, जिसके अधिकार क्षेत्र में मुख्य रूप से छात्रों से संबंधित सभी मामले और गतिविधियाँ लाई जानी चाहिए। इसके कामकाज में छात्रों की सार्थक भागीदारी को संस्थागत रूप दिया जाना चाहिए ताकि अधिक पारदर्शिता, जवाबदेही और छात्रों की चिंताओं का प्रभावी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके। कार्यालय को छात्रों की शैक्षणिक, पाठ्येतर, सांस्कृतिक, कैंपस उत्सव और समारोह-संबंधी, तथा अन्य कल्याण संबंधी चिंताओं के समयबद्ध, सुलभ और जवाबदेह तरीके से समाधान के लिए एक स्पष्ट और समर्पित, तंत्र भी स्थापित करना चाहिए।
11. हॉस्टल प्रतिनिधियों की मान्यता:
अंडरग्रेजुएट हॉस्टल्स के लिए एमबीबीएस से एक हॉस्टल प्रतिनिधि को आधिकारिक तौर पर मान्यता दी जा सकती है, जो छात्रों की हॉस्टल से जुड़ी चिंताओं का प्रतिनिधित्व करे, हॉस्टल की सुविधाओं और कल्याण से जुड़े मुद्दे उठाए, और हॉस्टल प्रशासन तथा छात्र कल्याण से संबंधित बैठकों में भाग ले।
प्रतिलिपि प्रेषित:
1. केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री, भारत सरकार
2. राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी)
3. अध्यक्ष, एम्स जोधपुर
4. कार्यकारी निदेशक, एम्स जोधपुर
5. डीन (शैक्षणिक), एम्स जोधपुर
6. चिकित्सा अधीक्षक, एम्स जोधपुर
7. सभी विभागाध्यक्ष, एम्स जोधपुर
8. छात्र कल्याण समिति, एम्स जोधपुर
