ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (AIPEF) का हरियाणा इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (HERC) को पत्र
AIPEF को इस बात पर गहरी आपत्ति है कि HERC द्वारा ‘इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड‘ के गुरुग्राम और नूह में समानांतर वितरण लाइसेंस के आवेदन पर कार्यवाही जिस गति और तरीके से पूरी की जा रही है, वह चिंताजनक है।

(अंग्रेजी पत्र का अनुवाद)
ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन
(सोसाइटीज़ एक्ट XXI, 1860 के तहत पंजीकृत), पंजीकरण सं. 24085/93
रजिस्टर्ड मुख्यालय: B-1A/45A, जनकपुरी, नई दिल्ली–110058
चेयरमैन का पत्राचार का पता: हाइडल फील्ड हॉस्टल, 17 राणा प्रताप मार्ग, लखनऊ–226001
मोबाइल: 09415006225 फ़ोन: 0522-4107706 (कार्यालय), फ़ैक्स: 0522-2205417/0522-4079628
Email : chairmanaipef@gmail.com ersdubeylko@gmail.com & ersdubey@yahoo.com
सं. 54 – 2026 /AIPEF / HERC 05-10-2026
सेवा में,
सचिव,
हरियाणा विद्युत नियामक आयोग,
बेज़ नंबर 33–36, सेक्टर–4,
पंचकूला – 134112, हरियाणा।
विषय: AIPEF के दिनांक 29.09.2026 के पत्र संख्या 53 का स्मरण पत्र — गुरुग्राम और नूंह हेतु ‘इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड‘ को प्रस्तावित समानांतर वितरण लाइसेंस के संबंध में HERC याचिका संख्या 30/2026 पर प्रभावी सुनवाई, पूर्ण पारदर्शिता तथा कोई भी एकतरफा या अंतिम निर्णय न लिए जाने का अनुरोध।
महोदय,
मैं ‘ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन’ (AIPEF) की ओर से हमारे 29.09.2026 के पत्र संख्या 53–2026/AIPEF/HERC के सिलसिले में यह पत्र लिख रहा हूँ। इस पत्र में AIPEF ने HERC याचिका संख्या 30/2026 की कार्यवाही के तरीके पर कड़ा विरोध जताया था और गुरुग्राम व नूह के लिए प्रस्तावित ‘समानांतर वितरण लाइसेंस’ पर कोई भी अंतिम निर्णय लेने से पहले मौखिक सुनवाई का उचित अवसर देने का अनुरोध किया था।
AIPEF द्वारा उठाए गए मुद्दों की गंभीरता के बावजूद, हमें अब तक माननीय आयोग से कोई लिखित सूचना नहीं मिली है जिसमें स्थिति स्पष्ट की गई हो या हमारे उक्त पत्र में विशेष रूप से अनुरोध की गई प्रभावी सुनवाई का मौका AIPEF को दिया गया हो।
इसलिए, AIPEF अपनी बात दोहराने और निम्नलिखित बिंदुओं को अधिकृत रखने के लिए मजबूर है:
1. AIPEF ने कभी भी सुनवाई का मौका नहीं ठुकराया है।
जैसा कि 29.09.2026 के हमारे पत्र नंबर 53 में साफ़ बताया गया है, AIPEF ने सुनवाई से इनकार नहीं किया था। AIPEF ने लखनऊ और हैदराबाद से आने वाले अपने वरिष्ठ पदाधिकारियों की पहले से तय व्यस्तताओं और यात्रा की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए, 02 अक्टूबर 2026 के बाद की कोई उचित तारीख मांगी थी।
सुनवाई के लिए थोड़े समय और उचित आधार पर स्थगन (adjournment) के अनुरोध को, सुनवाई के अधिकार को छोड़ने या उससे पीछे हटने के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
AIPEF ने पहले ही 19.06.2026 को मूल याचिका पर विस्तृत लिखित आपत्तियां/टिप्पणियां और 14.09.2026 को एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट पर अपनी टिप्पणियां दाखिल कर दी थीं। मौखिक सुनवाई की मांग का मकसद सिर्फ़ उन लिखित बातों को और साफ़ करना और उनमें कुछ और जानकारी जोड़ना था, ताकि आयोग कोई अंतिम फ़ैसला ले सके।
2. यह मामला बहुत ज़्यादा सार्वजनिक महत्व का है।
गुरुग्राम और नूंह के लिए प्रस्तावित ‘पैरेलल डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस’ (समानांतर वितरण लाइसेंस) कोई आम वाणिज्य लाइसेंसिंग का मामला नहीं है।
गुरुग्राम और नूंह हरियाणा के आर्थिक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाके हैं और इनमें बड़े औद्योगिक, कमर्शियल और ज़्यादा राजस्व वाले लोड सेंटर शामिल हैं। इन इलाकों में वितरण व्यवस्था में किसी भी तरह के बदलाव के दूरगामी असर हो सकते हैं, जैसे कि:
- मौजूदा सार्वजनिक वितरण लाइसेंसधारी;
- बिजली उपभोक्ता;
- किसान और सब्सिडी पाने वाले उपभोक्ता वर्ग;
- क्रॉस-सब्सिडी व्यवस्था;
- कर्मचारी और इंजीनियर;
- वितरण इंफ्रास्ट्रक्चर और सिस्टम प्लानिंग; और
- सार्वजनिक बिजली वितरण प्रणाली की लंबे समय की वित्तीय व्यवहार्यता।
आयोग ने खुद पहले प्रस्तावित निवेश के बड़े पैमाने और लंबे समय के असर, और उपभोक्ताओं, मौजूदा वितरण लाइसेंसधारी और कुल रेगुलेटरी ढांचे पर इसके संभावित प्रभाव को माना था। ऐसे हालात में, प्रक्रिया की निष्पक्षता और सभी संबंधित पक्षों (हितधारकों) की पर्याप्त भागीदारी और भी ज़रूरी हो जाती है।
3. कोई जल्दबाजी या पहले से तय नतीजा नहीं होना चाहिए
AIPEF को इस बात की गंभीर चिंता है कि कार्यवाही को किस गति और तरीके से नतीजे तक पहुँचाया जा रहा है।
हम सम्मानपूर्वक कहना चाहते हैं कि राज्य के सबसे ज़्यादा राजस्व वाले इलाकों में से एक में समानांतर वितरण लाइसेंस देने के मामले में कोई एकतरफा, जल्दबाजी भरा या पहले से तय फैसला नहीं लिया जाना चाहिए।
AIPEF यह आरोप नहीं लगा रहा है कि माननीय आयोग ने आवेदक के पक्ष में पहले ही कोई फैसला ले लिया है। परंतु, कार्यवाही से जुड़े हालात यह मांग करते हैं कि पूरी प्रक्रिया स्पष्ट रूप से पारदर्शी, निष्पक्ष, सबकी भागीदारी वाली और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप होनी चाहिए।
4. आवेदक द्वारा कैविएट दाखिल किए जाने पर अधिक पारदर्शिता की मांग होती है।
AIPEF ने यह भी देखा है कि ‘इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड’ ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में कैविएट दाखिल की है। ऐसा लगता है कि कंपनी को चल रही नियामक कार्यवाही के नतीजों को लेकर किसी संभावित कानूनी चुनौती की आशंका है।
AIPEF ने यह चिंता पहले ही माननीय आयोग के सामने रखी थी।
हम सम्मानपूर्वक फिर से कहना चाहते हैं कि ऐसी घटना से स्वाभाविक रूप से सवाल उठते हैं, जिनका समाधान नियामक प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाना चाहिए। AIPEF सिर्फ़ कैविएट दाखिल करने के आधार पर कोई आरोप नहीं लगा रहा है; फिर भी, हालात को देखते हुए यह बहुत ज़रूरी है कि कोई भी अंतिम आदेश जारी होने से पहले, इससे प्रभावित हर हितधारक को अपनी बात रखने का सही और सार्थक मौका दिया जाए।
5. प्रस्तावित लाइसेंस की बारीकी से जांच की ज़रूरत है
AIPEF ने पहले ही आयोग के सामने आवेदक के अनुभव, आर्थिक क्षमता, इंफ्रास्ट्रक्चर की तैयारी और वितरण लाइसेंसधारी के तौर पर कानूनी ज़िम्मेदारियां निभाने की क्षमता से जुड़े गंभीर मुद्दे उठाए हैं।
जैसा कि पहले ही रिकॉर्ड में लाया जा चुका है, ‘इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड’ को 2025 में ही बनाया गया था और इसकी पेड-अप शेयर कैपिटल ₹1 करोड़ है, जबकि कार्यवाही में बताई गई प्रस्तावित निवेश की ज़रूरत कई हज़ार करोड़ रुपये की है।
इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 और लागू नियमों व कानूनों के तहत कोई भी फ़ैसला लेने से पहले इन मुद्दों की सावधानीपूर्वक और पारदर्शी तरीके से जांच की जानी चाहिए।
6. प्रभावी सुनवाई और अंतिम आदेश से संयम बरतने का अनुरोध
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- इस मामले की खास अहमियत को देखते हुए, AIPEF एक बार फिर माननीय आयोग से सम्मानपूर्वक अनुरोध करता है कि:
- इस पत्र को AIPEF के पत्र संख्या 53 (दिनांक 29.09.2026) के औपचारिक स्मरण और उसी क्रम में आगे की कार्रवाई के तौर पर अभिलेख में लिया जाए;
- AIPEF को एक्सपर्ट कमिटी की रिपोर्ट और प्रस्तावित समांतर वितरण लाइसेंस पर अपनी आपत्तियों/टिप्पणियों के संबंध में मौखिक सुनवाई का पूरा, सार्थक और प्रभावी मौका दिया जाए;
- यह स्पष्ट रूप से अभिलेख किया जाए कि AIPEF का पिछला अनुरोध सुनवाई से इनकार या सुनवाई का अधिकार छोड़ने के बारे में नहीं था, बल्कि यह केवल एक उचित तारीख के लिए अनुरोध था ताकि उसके वरिष्ठ पदाधिकारी प्रभावी ढंग से उपस्थित हो सकें;
- Eleven Power Private Limited को प्रस्तावित समानांतर वितरण लाइसेंस देने के लिए कोई भी अंतिम आदेश तब तक न दिया जाए, जब तक AIPEF को अपनी बात रखने का उचित मौका न मिल जाए और उनकी बातों पर ठीक से विचार न कर लिया जाए;
- यह पक्का किया जाए कि सभी प्रभावित पक्षों – जैसे मौजूदा सार्वजनिक DISCOM, कर्मचारियों, इंजीनियरों, उपभोक्ताओं, किसानों और अन्य आपत्ति करने वालों – को आयोग के सामने अपनी बात रखने का निष्पक्ष और सार्थक मौका मिले;
- यह पक्का किया जाए कि संबंधित पक्षों द्वारा दर्ज कराई गई सभी अहम आपत्तियों और बातों पर ठीक से विचार किया जाए और अंतिम आदेश में उन पर खास तौर पर ध्यान दिया जाए; और
- पूरी तरह से संस्थागत निष्पक्षता, पारदर्शिता और प्रक्रियात्मक निष्पक्षता बनाए रखी जाए, ताकि पहले से तय नतीजे की कोई भी आशंका न रहे।
AIPEF एक बार फिर यह दोहराता है कि वह माननीय आयोग के कानूनी अधिकार और स्वतंत्रता का पूरा सम्मान करता है। साथ ही, जनहित को ध्यान में रखते हुए, AIPEF का दृढ़ विश्वास है कि जल्दबाजी में या ऐसी प्रक्रिया के ज़रिए कोई समानांतर वितरण लाइसेंस नहीं दिया जाना चाहिए, जिसमें सभी प्रभावित पक्षों को भागीदारी का वास्तविक और प्रभावी मौका न मिले।
यह मामला सिर्फ़ एक आवेदक के वाणिज्य हितों का नहीं है। यह हरियाणा की सार्वजनिक बिजली वितरण प्रणाली के भविष्य, मौजूदा सार्वजनिक DISCOM की आर्थिक व्यवहार्यता, उपभोक्ताओं और किसानों के हितों, और हज़ारों बिजली इंजीनियरों व कर्मचारियों की जायज़ चिंताओं से जुड़ा है।
इसलिए, AIPEF माननीय आयोग से पुरज़ोर आग्रह करता है कि वह यह सुनिश्चित करे कि कार्यवाही पूरी पारदर्शिता, निष्पक्षता और संस्थागत मर्यादा के साथ आगे बढ़ाई जाए।
AIPEF देश की वैधानिक और न्यायिक संस्थाओं में अपना पूरा भरोसा दोहराता है। हालाँकि, अगर AIPEF और इससे प्रभावित अन्य पक्षों को अपनी बात रखने का उचित मौका दिए बिना कोई एकतरफ़ा फ़ैसला लिया जाता है, तो AIPEF व्यापक जनहित में उपलब्ध लोकतांत्रिक, संवैधानिक और कानूनी उपायों को अपनाने के लिए मजबूर होगा।
हमें पूरी उम्मीद है कि माननीय आयोग इस अनुरोध पर सही नज़रिए से विचार करेगा और HERC याचिका संख्या 30/2026 में किसी भी अंतिम निर्णय की दिशा में आगे बढ़ने से पहले AIPEF को सुनवाई के लिए जल्द ही कोई तारीख देगा।
सादर,
आपका विश्वासी,

शैलेन्द्र दुबे
अध्यक्ष
प्रतिलिपि:
- चेयरमैन/कार्यवाहक चेयरमैन, HERC, पंचकूला।
- सदस्य, HERC, पंचकूला।
- प्रधान सचिव (ऊर्जा), हरियाणा सरकार, चंडीगढ़।
- चेयरमैन-सह-प्रबंध निदेशक, उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड / दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड, जैसा भी लागू हो।
