कॉम. सुरेश राठी, प्रधान सचिव, ऑल हरियाणा पॉवर कारपोरेशन वर्कर्स यूनियन एवं सदस्य, संयुक्त मोर्चा, हरियाणा से प्राप्त जानकारी के आधार पर कामगार एकता कमिटी संवाददाता की रिपोर्ट

हाल ही में, हरियाणा बिजली मज़दूरों की करीब ४० घंटे हड़ताल के सामने, हरियाणा राज्य सरकार को झुकना पड़ा और घोषित करना पड़ा कि समानांतर लाइसेंस वे मंजूर नहीं करेंगेl हेल्पर से इंजीनियरों तक सभी बिजली मज़दूरों की जुझारू एकता, पूरे देशभर से बिजली मज़दूरों का समर्थन एवं हड़ताल को अनेकों दूसरे मजदूर संगठनों, किसान संगठनों तथा उपभोक्ताओं का भी सक्रिय समर्थन से यह आंदोलन इतना शक्तिशाली साबित हुआ।
उत्तर प्रदेश, जम्मू कश्मीर, पुडुचेरी तथा हाल ही में कर्नाटक में आम लोग और उनके संगठन बिजली क्षेत्र के निजीकरण विरोधी संघर्ष में रास्ते पर उतरे। यह बेहद महत्वपूर्ण सच्चाई है, कि निजीकरण विरोधी संघर्ष की जीत तभी सुनिश्चित होगी जब इस तरह की एकता बनेगी।
हरियाणा में इस दिशा में बिजली मज़दूरों ने क्या किया, यह जानिए उनके खुद के शब्दों में, कॉमरेड सुरेश राठी से:
“जून २०२६ में हमें जानकारी मिली कि हरियाणा बिजली नियामक आयोग समानांतर लाइसेंस देने की तैयारी में है। हमें यह भी पता चला कि इलेवन पॉवर प्राईवेट लिमिटेड ने उसके लिए आवेदन भी दिया। हमें यह भी पता चला कि हरियाणा सरकार स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया तेज कर रही है एवं खेती बाड़ी को बिजली सप्लाई के लिए एक अलग कंपनी बनानेवाली है।
यह सभी कदम केवल बिजली मज़दूरों के ही नहीं बल्कि आम जनता के हित के विरोध में हैं, यह हमें स्पष्ट था।
इसलिए हम सभी ने तुरंत बिजली की सभी मजदूर यूनियनों एवं इंजीनियर एसोशिएशन की मीटिंग बुलाई और एक संयुक्त मोर्चा का गठन किया। यह संघर्ष केवल मज़दूरों का नहीं बल्कि सभी उपभोक्ताओं का भी है, यह समझकर हमनें उपभोक्ताओं के संघर्ष मंच, संयुक्त किसान मोर्चा संगठनों एवं दूसरे मजदूर संगठनों के साथ बातचीत की, और सभी का मिलकर एक संयुक्त मोर्चा गठित किया। उसके बाद सभी के साथ तालमेल करके ग्राम पंचायतों , जिला परिषदों तथा ग्रामीण एवं शहरी कालोनियों में योजनाबद्ध तरीके से, बिजली क्षेत्र के निजीकरण के खिलाफ प्रचार अभियान चलाया। सरकार तथा नियामक आयोग को असंख्य ऐतराज पत्र लिखे गए। सभी को जनसुनवाईयों में शामिल होकर इन योजनाओं को विरोध करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
सभी का अनुभव है कि स्थाई कर्मचारी जब आंदोलन करते है, तब अस्थाई कर्मचारियों द्वारा काम चलाकर, सरकारें स्थाई कर्मचारीयों के आंदोलनों को कुचलती है। इसलिए जब यह संयुक्त मोर्चा गठित किया तभी से, अनुबंधित कर्मचारियों की यूनियनों से तुरंत बातचीत करके उन्हें भी संयुक्त मोर्चा में शामिल किया। अनुबंधित अस्थाई मज़दूरों की कई महत्वपूर्ण माँगे है, जैसे कि वेतन में बढ़ौतरी, समान काम के लिए समान वेतन, मेडिकल का खर्चा, जो २ वर्ष से ज्यादा समय से अस्थाई है उन्हें स्थाई करना, आदि। इन सभी मांगों के लिए उनके संघर्षों की हमने हमेशा हिमायत की है और आगे भी करेंगे यह विश्वास उन्हें है। इसलिए वे भी दिलों जान से इस संघर्ष में जुड़ गए।
राष्ट्रीय स्तर पर जो बिजली मज़दूरों के संगठन है जैसे EEFI, NCCOEEE, AIPEF आदि के साथ भी तालमेल सुनिश्चित किया।
इस सबके फलस्वरूप, हमने आयोजित कई विरोध प्रदर्शनों में तथा मीटिंगों में हमें सभी का सहयोग मिला। फिर जब हड़ताल शुरू हुई, तब कई खाप पंचायतों, मजदूर संगठनों, किसान संगठनों तथा राजनीतिक पार्टियों ने हड़ताल के समर्थन में सरकार को पत्र लिखे । हिमाचल प्रदेश और पंजाब के बिजली कर्मचारियों के संगठनों ने, हमारी हड़ताल को विफल बनाने की हरियाणा सरकार की साजिश में शामिल होने से इंकार किया।
ऐतिहासिक सफल हड़ताल के ४० घंटे बाद, हरियाणा सरकार को झुकना पड़ा और प्रेस कांफ्रेंस में घोषित करना पड़ा कि वह समानांतर वितरण लाइसेंस नहीं देगी। इस जीत का पूरा श्रेय बिजली मज़दूरों, उपभोक्ताओं, किसानों तथा दूसरे मजदूर संगठनों की मजबूत एकता को ही जाता है।
इस तरह के एकजुट संघर्ष से ही निजीकरण की योजनाओं का सफलतापूर्ण विरोध मुमकिन है।
कॉम. सुरेश राठी
प्रधान सचिव , ऑल हरियाणा पॉवर कारपोरेशन वर्कर्स यूनियन
एवं
सदस्य , संयुक्त मोर्चा, हरियाणा
9896345282”
