मध्य प्रदेश में बिजली कर्मचारियों द्वारा विशाल रैली का आयोजन

कामगार एकता कमिटी के संवाददाता की रिपोर्ट

मध्य प्रदेश में बिजली कर्मचारियों ने एक विशाल रैली निकाली और एक दिन के लिए काम का बहिष्कार किया। उनकी मुख्य मांग मध्य प्रदेश में लगभग 5,000 ठेका (कॉन्ट्रैक्ट) बिजली कर्मचारियों को नियमित (परमानेंट) करने की थी।

22 अक्टूबर को, ‘यूनाइटेड फोरम फॉर पावर एम्प्लॉयीज एंड इंजीनियर्स’ (UFPEE) ने मध्य प्रदेश के भोपाल में ठेका कर्मचारियों को नियमित करने की मांग को लेकर एक विशाल रैली और प्रदर्शन का आयोजन किया। इस प्रदर्शन में बिजली क्षेत्र के हजारों स्थायी और ठेका कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। कर्मचारियों ने एक दिन के लिए काम का बहिष्कार करने और विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की थी। कर्मचारी और इंजीनियर विभिन्न जिला मुख्यालयों और भोपाल की गोविंदपुरा बिजली कॉलोनी जैसी जगहों पर इकट्ठा हुए।

बिजली क्षेत्र के निजीकरण के खिलाफ और ठेका मजदूरों के पदों को नियमित करने की मांग को लेकर जोरदार भाषण दिए गए और नारे लगाए गए। वक्ताओं ने बताया कि उन्होंने कई सांसदों, विधायकों और जिला कलेक्टरों को अपनी मांगों से जुड़े पत्र और ज्ञापन सौंपने की कोशिश की, लेकिन उनकी समस्याओं के समाधान के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है। मध्य प्रदेश में लगभग 5,000 बिजली कर्मचारी अस्थायी रूप से ठेके पर काम कर रहे हैं। इनमें से कई कर्मचारी तो 10-15 वर्षों से भी अधिक समय से काम कर रहे हैं। उन्हें स्थायी करने का आश्वासन कई बार दिया गया है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में ठेका कर्मचारियों की संख्या कम होने के बजाय बढ़ती ही गई है।

कर्मचारी लगातार मांग कर रहे हैं कि ठेका मजदूरों की पदों को नियमित किया जाए। बिजली क्षेत्र के कर्मचारियों के विरोध प्रदर्शन के बाद, 24 जुलाई, 2026 को ऊर्जा विभाग यह घोषणा करने के लिए मजबूर हुआ कि वे इस मामले पर विचार करेंगे और मध्य प्रदेश में ठेका कर्मचारियों को नियमित करने के लिए एक आंतरिक परीक्षा करेंगे। इस परीक्षा को पूरा करने और नियमितीकरण की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए 31 अक्टूबर, 2026 की तारीख तय की गई थी। बिजली कर्मचारियों का कहना है कि तय समय-सीमा खत्म होने में अब 10 दिन से भी कम समय बचा है, लेकिन उनकी मांगों को पूरा करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है।

कर्मचारियों ने कई बार इस बात पर जोर दिया है कि ठेका प्रथा न केवल उनसे उनकी नौकरी की सुरक्षा छीनती है, बल्कि उनका बड़े पैमाने पर शोषण भी करती है, जिसका सीधा असर सेवा की गुणवत्ता पर भी पड़ता है। पिछले कुछ वर्षों में आउटसोर्सिंग बहुत बढ़ गई है और अनुबंध पर काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या में भी लगातार इजाफा हुआ है। कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें बिना किसी और देरी के नियमित (परमानेंट) किया जाए। उनका यह भी कहना है कि 15 साल की सेवा पूरी होने के बाद किसी आंतरिक परीक्षा की कोई जरूरत नहीं होनी चाहिए, और परीक्षा कराने का हवाला देकर की जाने वाली किसी भी देरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कर्मचारियों ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर दिवाली से पहले उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो वे सात दिन का नोटिस देकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।

बिजली कर्मचारियों की मांगें पूरी तरह से जायज हैं और इनका समर्थन किया जाना चाहिए।

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