हरियाणा में बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों के संयुक्त संघर्ष ने समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस पर रोक लगाई

कामगार एकता कमिटी संवाददाता की रिपोर्ट

28 अक्टूबर 2026 को हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) ने अपने आदेश में घोषित किया कि वह किसी मौजूदा या भविष्य में किसी भी समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस याचिका पर कोई कार्रवाही नहीं करेगा। इस तरह फिलहाल के लिए राज्य में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने पर रोक लग गई है। (आदेश का संक्षिप्त विवरण नीचे प्रस्तुत है।)

यह रोक हरियाणा में बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों को 22 और 23 अक्टूबर को अत्यंत सफल हड़ताल का अंजाम है। हड़ताल ने राज्य सरकार को विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 108(1) के तहत 26 अक्टूबर 2026 (पत्र दिनांक 28.10.2026) को आयोग को 23 अक्टूबर को ही विनियामक आयोग को यह लिखित निर्देश जारी करने पर मजबूर कर दिया कि राज्य में कहीं भी कोई भी समानांतर वितरण लाइसेंस न दिया जाए, न लागू किया जाए और न ही क्रियान्वित किया जाए।

हरियाणा के बिजली कर्मचारी और इंजीनियर इस सफल संघर्ष के लिए बधाई के पात्र हैं। यह सफलता उनके एकजुट संघर्ष के कारण संभव हो सकी। उन्होंने सभी विभाजनों के एक तरफ कर “हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजिनीयर संयुक्त संघर्ष मोर्चा” का गठन किया। उन्होंने अपने निजीकरण के संघर्ष में उपभोक्ताओं के संगठनों, किसान संगठनों, ग्राम पंचायतों, खाप संगठनों को साथ जोड़ने का प्रसंशनीय काम किया। देश भर के बिजली श्रमिकों का भी समर्थन उन्हें मिला। पंजाब, हिमाचल प्रदेश, एवं उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों ने अपने राज्य के बिजली प्रसाशन को लिख कर बोल दिया कि वे हड़ताल के दौरान बिजली व्यवस्था चालू रखने के लिए हरियाणा सरकार की मदद करने नहीं जाएंगे।

हरियाणा के सफल संघर्ष ने फिर एक बार दिखा दिया कि बिजली श्रमिकों में पूंजीपति वर्ग के निजीकरण अजेंडा लागू करने के लिए सरकारों के मजदूर- विरोधी, लोक-विरोधी निर्णयों को रोकने की शक्ति है।

निजीकरण को सदैव को रोकने के लिए बिजली मजदूरों को अन्य क्षेत्रों के मजदूरों के साथ एकजुट होकर मजदूरों की सत्ता स्थापित करने की दिशा में कार्यान्वित होना होगा।

हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) आदेश – संक्षिप्त विवरण

यह आदेश हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) द्वारा 28 अक्टूबर 2026 को याचिका संख्या HERC/Petition No. 30 of 2026 पर जारी किया गया है:

मामले की पृष्ठभूमि: 19 अक्टूबर 2026 के अपने आदेश में आयोग ने इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड (EPPL) को गुरुग्राम और नूंह राजस्व जिलों में 25 वर्षों के लिए एक समानांतर (पैरेलल) बिजली वितरण लाइसेंस मंजूर किया था। EPPL ने 21 अक्टूबर 2026 को इस लाइसेंस की शर्तों को स्वीकार कर लिया था।

हरियाणा सरकार के निर्देश (धारा 108): हरियाणा सरकार के ऊर्जा विभाग ने विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 108(1) के तहत 26 अक्टूबर 2026 (पत्र दिनांक 28.10.2026) को आयोग को लिखित निर्देश जारी किए। सरकार ने सार्वजनिक हित, उपभोक्ताओं के हित और राज्य DISCOMs (DHBVNL/UHBVNL) पर पड़ने वाले वित्तीय प्रभाव व जनता/कर्मचारियों के विरोध को ध्यान में रखते हुए निर्देश दिया कि राज्य में कहीं भी कोई भी समानांतर वितरण लाइसेंस (Parallel Distribution Licence) न बनाया जाए, न लागू किया जाए और न ही क्रियान्वित (operationalise) किया जाए।

EPPL की सुनवाई की याचिका खारिज: EPPL द्वारा अग्रिम सूचना और सुनवाई का अवसर दिए जाने के अनुरोध को आयोग ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि सरकार द्वारा दिए गए नीतिगत निर्देश धारा 108 के तहत अंतिम और सर्वव्यापी हैं, जिसमें आयोग के पास कोई नई न्यायिक कार्रवाई करने का अधिकार शेष नहीं बचता है।

अंतिम निर्णय: आयोग ने हरियाणा सरकार द्वारा जारी निर्देशों के आलोक में यह निर्णय लिया है कि जब तक ये निर्देश प्रभावी रहेंगे, आयोग इस मामले में आगे कोई कार्रवाई नहीं करेगा।

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