लोको पायलटों ने ड्यूटी के दौरान अपने साथ डेटोनेटर रखने के निर्देशों के खिलाफ अपना आंदोलन तेज कर दिया

कॉमरेड पिंटू रॉय, ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (AILRSA) सेंट्रल ज़ोन से मिली जानकारी और सेंट्रल रेलवे, मुंबई के महाप्रबंधक तथा प्रधान मुख्य सुरक्षा आयुक्त को लिखे गए उनके पत्र के आधार पर कामगार एकता कमिटी संवाददाता की रिपोर्ट

भारतीय रेलवे के कई ज़ोनों में लोको रनिंग स्टाफ उन नए निर्देशों का ज़ोरदार विरोध कर रहा है, जिनके तहत लोको पायलटों को अपने साथ डेटोनेटर (जो खतरनाक और विस्फोटक उपकरण होते हैं) रखने के लिए कहा गया है। हम पहले भी उनके संघर्षों के बारे में बता चुके हैं।

सेंट्रल रेलवे के लोको पायलटों ने अपने आंदोलन को और तेज़ करने का फ़ैसला किया है। 22 अक्टूबर को, ऑल इंडिया लोको-रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (AILRSA) के बैनर तले, बड़ी संख्या में लोको पायलटों ने मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस स्थित सेंट्रल रेलवे के महाप्रबंधक कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।

उन्होंने महाप्रबंधक और अन्य रेलवे अधिकारियों को एक ज्ञापन (संलग्न) भी सौंपा। इस पत्र में एक बहुत महत्वपूर्ण तथ्य की ओर ध्यान दिलाया गया है कि रेलवे बोर्ड ने स्वयं, 17.08.2004 के अपने पत्र संख्या TC-II/2077/04/1 के माध्यम से, ट्रेनों में विस्फोटक और ज्वलनशील वस्तुओं को ले जाने पर प्रतिबंध लगाने के संबंध में निर्देश जारी किए थे। इसलिए, पत्र में आगे यह भी बताया गया है कि हाल ही में जारी किए गए निर्देश, रेलवे बोर्ड के उन निर्देशों की अनदेखी करते हैं।

इस पत्र में रेलवे बोर्ड को यह भी चेतावनी दी गई है कि भविष्य में यदि कोई लोको पायलट डेटोनेटर ले जाने से मना करता है, तो इसे “ड्यूटी करने से इनकार” नहीं माना जा सकता। साथ ही, सुरक्षा से जुड़ी ऐसी जायज आपत्ति जताने या लागू कानून का पालन करने की मांग करने पर, किसी कर्मचारी के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई, चार्ज मेमोरेंडम, शो-कॉज नोटिस, सर्विस रिकॉर्ड में प्रतिकूल प्रविष्टि, सजा या कोई अन्य दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती।

इस पत्र में सेंट्रल रेलवे के महाप्रबंधक, आरपीएफ के प्रधान मुख्य सुरक्षा आयुक्त, और महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक/अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (रेलवे) से यह आग्रह किया गया है कि वे उचित प्रशासनिक और सुरक्षा स्तरों पर इस मामले की जांच करें।

लोको-पायलटों द्वारा उठाया गया मुद्दा न केवल उनकी अपनी सुरक्षा के लिए, बल्कि यात्रियों और रेलवे स्टेशनों पर मौजूद सभी लोगों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर मायने रखता है। लोको-पायलटों को सभी कामकाजी लोगों का समर्थन मिलना चाहिए।

 

(अंग्रेजी पत्र का अनुवाद)

पत्र संख्या: AILRSA/CR/GS/DETONATORS/2026 तारीख : 22.10.2026

प्रति,

1. महाप्रबंधक

मध्य रेलवे, (CSMT), मुंबई।

2. प्रधान मुख्य सुरक्षा आयुक्त (PCSC)

रेलवे सुरक्षा बल (RPF), मध्य रेलवे, CSMT, मुंबई।

3. पुलिस महानिदेशक / अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (रेलवे)

महाराष्ट्र सरकार,

प्रभारी, राजकीय रेलवे पुलिस (GRP), महाराष्ट्र।

विषय: लोको रनिंग स्टाफ द्वारा विस्फोटक को जबरन अपने पास रखने, उनका परिवहन करने और उन्हें अपने पास बनाए रखने के संबंध में औपचारिक शिकायत, कानूनी अभ्यावेदन और अग्रिम सूचना — वैधानिक अनुपालन, यात्रियों की सुरक्षा, कर्मचारियों की सुरक्षा और भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 से जुड़ी गंभीर चिंताएं।

संदर्भ:

  1. रेलवे बोर्ड का पत्र संख्या TC-II/2077/04/1, दिनांक 17.08.2004, जो ट्रेनों में विस्फोटक और ज्वलनशील वस्तुओं को ले जाने पर लगी पाबंदियों से संबंधित है।
  2. विस्फोटक अधिनियम, 1884 और विस्फोटक नियम, 2008 के प्रावधान, जो विस्फोटक को रखने, संभालने और उनके परिवहन पर लागू होते हैं।
  3. भारत के संविधान का अनुच्छेद 21, जो जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा की गारंटी देता है।

आदरणीय महोदय,

ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (AILRSA), सेंट्रल रेलवे की ओर से, नीचे हस्ताक्षर करने वाला व्यक्ति यह औपचारिक शिकायत-सह-कानूनी प्रतिवेदन प्रस्तुत कर रहा है। इसका उद्देश्य आपका ध्यान सुरक्षा और कानूनी मामलों से जुड़ी एक गंभीर चिंता की ओर आकर्षित करना है, जो रेलवे ड्यूटी के दौरान लोको रनिंग स्टाफ को व्यक्तिगत रूप से डेटोनेटर (विस्फोटक) अपने पास रखने के लिए कहे जाने की प्रथा से उत्पन्न होती है। इसमें यात्री ट्रेनों में यात्रा करना, सार्वजनिक स्थानों से गुजरना, और रनिंग रूम/रेस्ट रूम में आराम करते समय भी इन सामग्रियों को अपने पास रखना जैसी स्थितियां शामिल हैं।

यह मामला सीधे तौर पर रेलवे कर्मचारियों, यात्रियों और आम जनता की सुरक्षा, तथा विस्फोटक सामग्री के कानूनी रख-रखाव, निगरानी और परिवहन से जुड़ा है।

यह प्रतिवेदन केवल प्रशासनिक पुनर्विचार के अनुरोध के रूप में ही नहीं, बल्कि एसोसिएशन की सुरक्षा संबंधी आपत्तियों के औपचारिक रिकॉर्ड, वैधानिक जांच के अनुरोध, और सुरक्षा से जुड़ी किसी वास्तविक चिंता के कारण की जा सकने वाली किसी भी दंडात्मक या अनुशासनात्मक कार्रवाई के विरुद्ध पूर्व सूचना के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।

1. रेलवे बोर्ड के 17.08.2004 के निर्देशों पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।

रेलवे बोर्ड ने 17.08.2004 के अपने पत्र संख्या TC-II/2077/04/1 के माध्यम से, ट्रेनों में विस्फोटक और ज्वलनशील वस्तुओं को ले जाने पर लगी पाबंदियों के संबंध में निर्देश जारी किए थे।

इस पत्र में IRCA कोचिंग टैरिफ संख्या 25 के नियम 505 और 506 का उल्लेख किया गया था, और यात्री ट्रेनों तथा डिब्बों में विस्फोटक और अन्य खतरनाक वस्तुओं को ले जाने पर लागू पाबंदियों को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया गया था।

पत्र में आग से जुड़ी घटनाओं को रोकने की आवश्यकता पर भी ध्यान दिलाया गया था और जोनल रेलवे को निर्देश दिया गया था कि वे लागू नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें।

इन निर्देशों को देखते हुए, एसोसिएशन यह स्पष्ट करना चाहती है कि वह कौन-सा कानूनी और प्रशासनिक अधिकार है, जिसके तहत लोको रनिंग स्टाफ को अपने पास डेटोनेटर रखने पड़ते हैं—खासकर तब, जब उन्हें यात्री डिब्बों या आम जनता की मौजूदगी वाले अन्य स्थानों से होकर ले जाना पड़ता है।

एसोसिएशन का विनम्र निवेदन है कि रेलवे बोर्ड के उक्त पत्र को, डेटोनेटर ले जाने से संबंधित कानूनी प्रावधानों और इस संबंध में मौजूद किसी भी विशेष, वैध अपवाद या अनुमति के साथ मिलाकर पढ़ा जाना चाहिए।

केवल एक सामान्य परिचालन आवश्यकता को, लागू कानूनी पाबंदियों या निर्धारित सुरक्षा शर्तों की अनदेखी करने का पर्याप्त आधार नहीं माना जा सकता।

2. डेटोनेटर विस्फोटक वस्तुएं हैं, जिनके लिए उचित सुरक्षा नियंत्रण आवश्यक हैं।

डेटोनेटर कोई सामान्य रेलवे उपकरण या व्यक्तिगत सामान नहीं हैं। ये विस्फोटक वस्तुएं हैं, जिनके रखरखाव, कस्टडी और परिवहन का मूल्यांकन लागू विस्फोटक कानूनों और सुरक्षा प्रक्रियाओं के तहत किया जाना चाहिए।

‘विस्फोटक अधिनियम, 1884’और ‘विस्फोटक नियम, 2008’ विस्फोटकों के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान करते हैं, जिसमें उनके परिवहन और रखरखाव से जुड़ी जरूरी शर्तें और प्रतिबंध शामिल हैं।

एसोसिएशन रेलवे सुरक्षा उपकरणों की उस वैध परिचालन आवश्यकता पर कोई सवाल नहीं उठाता, जहां ऐसे उपकरणों का उपयोग कानूनी रूप से अनिवार्य किया गया हो। हालांकि, किसी परिचालन आवश्यकता का होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि ऐसी सामग्री को ले जाने या अपने पास रखने का हर तरीका कानूनी, सुरक्षित या अधिकृत है।

तदनुसार, रेलवे प्रशासन को स्पष्टीकरण देना होगा:

  1. वह स्पष्ट कानूनी प्रावधान, रेलवे बोर्ड का निर्देश या सक्षम प्राधिकारी का आदेश, जो लोको रनिंग स्टाफ को डेटोनेटर अपने साथ ले जाने की अनुमति देता है।
  2. ऐसे डेटोनेटर की मात्रा, पैकेजिंग, सुरक्षा, आवाजाही और परिवहन से जुड़ी लागू शर्तें।
  3. क्या ले जाने का प्रस्तावित तरीका, यात्री और मिश्रित ट्रेनों से संबंधित लागू प्रतिबंधों का पालन करता है?
  4. क्या किसी निर्धारित अनुमति, प्रमाणन, दस्तावेज़ीकरण या विशेष हैंडलिंग प्रक्रिया की आवश्यकता है? यदि हाँ, तो इसका पालन कैसे सुनिश्चित किया जाता है?
  5. डेटोनेटर की सुरक्षित सुरक्षा, उन्हें खोने से बचाने, उनका हिसाब रखने, उन्हें वापस करने और उनकी रिपोर्टिंग करने की तय ज़िम्मेदारी।

जब तक इन मामलों की जांच नहीं हो जाती और स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक कर्मचारियों से व्यक्तिगत रूप से विस्फोटक सामग्री ले जाने के लिए कहना सुरक्षा से जुड़ी एक जायज और गंभीर चिंता पैदा करता है।

3. यात्री डिब्बों में और यात्रियों के बीच जबरन सामान ले जाना

एसोसिएशन को लोको रनिंग स्टाफ के लिए एक गंभीर चिंताजनक विषय के बारे में जानकारी मिली है। उनसे यह अपेक्षा की जाती है कि वे यात्री ट्रेनों या कोचों में सफर करते समय और आम यात्रियों के बीच से गुजरते समय अपने साथ ‘डेटोनेटर‘ रखें।

यह स्थिति एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करती है: कर्मचारियों पर थोपे जा रहे इस परिवहन तरीके के लिए, आखिर कौन सा कानूनी प्रावधान या वैध अनुमति मौजूद है?

एसोसिएशन मांग करती है कि इस बात की जांच की जाए कि क्या मौजूदा तरीका ‘विस्फोटक अधिनियम, 1884’और ‘विस्फोटक नियम, 2008’, रेलवे बोर्ड के 17.08.2004 के निर्देशों और अन्य संबंधित सुरक्षा नियमों के अनुरूप है या नहीं।

एसोसिएशन स्पष्ट करना चाहती है कि वह रेलवे सुरक्षा से जुड़ी अपनी वैध जिम्मेदारियों से कोई छूट नहीं मांग रही है। वह केवल यह सुनिश्चित करना चाहती है कि इन जिम्मेदारियों का पालन एक कानूनी रूप से अधिकृत, सही ढंग से नियंत्रित और पूरी तरह से सुरक्षित प्रक्रिया के जरिए ही किया जाए।

यात्रियों और कर्मचारियों की सुरक्षा को किसी ऐसी अनौपचारिक व्यवस्था पर नहीं छोड़ा जा सकता, जिसकी कानूनी वैधता और सुरक्षा उपायों की कोई पुष्टि न की गई हो।

4. आराम की अवधि के दौरान रनिंग रूम/रेस्ट रूम में डेटोनेटर रखना

एक और गंभीर चिंता तब पैदा होती है जब लोको रनिंग स्टाफ को रनिंग रूम या रेस्ट रूम में ठहरने या आराम करने के दौरान, डेटोनेटर (विस्फोटक) अपने पास रखने के लिए कहा जाता है।

ऐसी जगहों का इस्तेमाल कई रेलवे कर्मचारी आराम करने के लिए करते हैं। आराम के समय किसी कर्मचारी के पास विस्फोटक सामग्री का होना, उसकी सुरक्षित स्टोरेज, उस तक पहुंच के नियंत्रण, जवाबदेही और आपातकालीन स्थिति में कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े करता है।

इसलिए, रेलवे प्रशासन से अनुरोध है कि वह निम्नलिखित व्यवस्था करे:

  • क्या संबंधित रनिंग रूम/रेस्ट रूम को, विस्फोटक वस्तुओं को रखने या अस्थायी रूप से सुरक्षित रखने के लिए अधिकृत या अनुमोदित किया गया है (जहाँ भी ऐसा प्राधिकरण कानूनी रूप से आवश्यक हो)?
  • क्या सुरक्षित भंडारण के लिए कोई निर्धारित व्यवस्था उपलब्ध है?
  • क्या विस्फोटक वस्तुओं को सुरक्षित रखने, सौंपने, प्राप्त करने और वापस करने के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है?
  • कर्मचारी के आराम के समय, डेटोनेटर को सुरक्षित रखने की आधिकारिक जिम्मेदारी किसकी होती है?
  • विस्फोटक वस्तुओं के खो जाने, चोरी हो जाने, गलती से क्षतिग्रस्त हो जाने या सुरक्षा से जुड़ी कोई अन्य घटना होने पर, क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है?

एसोसिएशन का कहना है कि कर्मचारियों को ऐसी स्थिति में नहीं डाला जाना चाहिए जहाँ उनसे यह अपेक्षा की जाए कि वे बिना स्पष्ट निर्देशों, उचित सुरक्षा उपायों और जिम्मेदारी के कानूनी व लिखित आवंटन के, आराम के समय विस्फोटक सामग्री की सुरक्षा की व्यक्तिगत जिम्मेदारी लें।

5. भारत के संविधान का अनुच्छेद 21: जीवन और व्यक्तिगत सुरक्षा का संरक्षण

भारत के संविधान का अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करता है। जीवन की सुरक्षा के लिए, व्यक्तिगत सुरक्षा से जुड़े वास्तविक खतरों पर गंभीरता से विचार करना आवश्यक है।

लोको रनिंग स्टाफ कठिन परिचालन स्थितियों में सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते हैं। इन जिम्मेदारियों का मतलब यह नहीं है कि वे सुरक्षा से जुड़ी जायज चिंताओं को नहीं उठा सकते, या किसी ऐसे निर्देश की वैधता पर स्पष्टीकरण नहीं मांग सकते जिससे उन्हें संभावित खतरे का सामना करना पड़ सकता है।

इसलिए, एसोसिएशन का यह मानना ​​है कि यदि कोई कर्मचारी लागू नियमों, सुरक्षित रखने की व्यवस्था, और डेटोनेटर को अपने पास रखने के लिए कानूनी अनुमति के बारे में स्पष्टीकरण मांगता है, तो इसे जानबूझकर की गई अवज्ञा या कदाचार नहीं माना जाना चाहिए।

यदि कोई कर्मचारी ऐसी परिस्थितियों में डेटोनेटर अपने पास रखने में असमर्थता जताता है या सुरक्षा संबंधी आपत्ति उठाता है, जो लागू नियमों या निर्धारित सुरक्षा उपायों के अनुरूप नहीं हैं, तो सक्षम प्राधिकारी को निष्पक्ष रूप से इस मामले की जांच करनी चाहिए।

प्रशासन से अनुरोध है कि वह डेटोनेटर जारी करने, उनके परिवहन, उन्हें सुरक्षित रखने और वापस जमा करने के लिए एक स्पष्ट, लिखित और कानूनी रूप से मान्य प्रक्रिया तैयार करे, ताकि कर्मचारियों और यात्रियों को किसी भी ऐसे खतरे का सामना न करना पड़े जिसे टाला जा सकता है।

जीवन और व्यक्तिगत सुरक्षा के अधिकार को केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता तक सीमित नहीं किया जा सकता। साथ ही, एसोसिएशन यह भी मानती है कि किसी भी निर्देश की वैधता का आकलन लागू कानूनी प्रावधानों, अधिकृत अपवादों और मामले के विशिष्ट तथ्यों के आधार पर किया जाना चाहिए।

6. संभावित अनुशासनात्मक कार्रवाई के संबंध में औपचारिक अग्रिम सूचना

एसोसिएशन निम्नलिखित स्थिति को औपचारिक रूप से रिकॉर्ड पर रखना आवश्यक समझती है।

यदि लोको रनिंग स्टाफ का कोई सदस्य, पूरी ईमानदारी से और सुरक्षा से जुड़े वास्तविक कारणों के आधार पर, डेटोनेटर (विस्फोटक) अपने पास रखने में असमर्थता जताता है या इस पर कोई तर्कसंगत आपत्ति उठाता है—चाहे वह आपत्ति कानूनी नियमों के पालन, यात्रियों की सुरक्षा, डेटोनेटर को सुरक्षित रखने, या संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा से जुड़ी हो—तो सक्षम प्राधिकारी को सबसे पहले उस आपत्ति की जांच करनी चाहिए और लागू नियमों तथा अधिकृत प्रक्रिया के बारे में तर्कसंगत स्पष्टीकरण देना चाहिए।

यदि इस अभ्यावेदन के बावजूद, किसी कर्मचारी के विरुद्ध केवल इसलिए कोई अनुशासनात्मक कार्यवाही, आरोप-पत्र, कारण बताओ नोटिस, सेवा-रिकॉर्ड में प्रतिकूल प्रविष्टि, दंड या कोई अन्य प्रतिशोधात्मक कार्रवाई शुरू की जाती है कि उसने सुरक्षा संबंधी कोई उचित आपत्ति उठाई है या लागू कानून का पालन करने की मांग की है, तो एसोसिएशन के पास यह अधिकार सुरक्षित है कि वह इस अभ्यावेदन और इसकी प्राप्ति-रसीद को एक समकालीन दस्तावेजी साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत करे।

यह दस्तावेज़ पहले ही इसलिए जमा किया जा रहा है ताकि रेलवे प्रशासन और संबंधित सुरक्षा व पुलिस अधिकारियों को सुरक्षा संबंधी चिंताओं, स्पष्टीकरण की मांग, और कानून सम्मत व तर्कपूर्ण जवाब की आवश्यकता के बारे में औपचारिक रूप से सूचित किया जा सके।

बाद में होने वाली किसी भी विभागीय या न्यायिक कार्यवाही में—जिसमें सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) या किसी अन्य सक्षम मंच के समक्ष होने वाली कार्यवाही भी शामिल है—एसोसिएशन इस प्रतिवेदन को, इसकी पावती , संबंधित निर्देशों और सहायक रिकॉर्ड के साथ पेश कर सकती है। इससे यह साबित किया जा सकेगा कि सुरक्षा संबंधी चिंताएं पहले ही उठा दी गई थीं और अधिकारियों को इस मामले की जांच करने का अवसर दिया गया था।

इसके अलावा, एसोसिएशन किसी भी ऐसी कार्रवाई को चुनौती देने का अधिकार सुरक्षित रखती है जो मनमानीपूर्ण हो, प्रतिशोध की भावना से की गई हो, प्रक्रिया के लिहाज से अनुचित हो, या लागू कानून के विपरीत हो।

इस पूर्व सूचना का उद्देश्य कानूनी कर्तव्यों को बिना सोचे-समझे मानने से इनकार करने को अधिकृत करना नहीं है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सुरक्षा से जुड़ी किसी वास्तविक आपत्ति को, लागू कानून, तथ्यों, कर्मचारी के स्पष्टीकरण और निर्धारित प्रक्रिया की जांच किए बिना, अपने आप ‘दुराचार‘ न मान लिया जाए।

7. विशिष्ट राहतें और अनुरोधित कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए, AILRSA निम्नलिखित अनुरोध करता है:

A. तत्काल सुरक्षा और कानूनी समीक्षा :- सेंट्रल रेलवे, RPF और GRP के संबंधित विभागों द्वारा, अपने-अपने अधिकार क्षेत्र के भीतर, लोको रनिंग स्टाफ से व्यक्तिगत रूप से डेटोनेटर (विस्फोटक उपकरण) ले जाने की वर्तमान प्रथा की संयुक्त या समन्वित जांच की जाए।

B. लागू निर्देशों को प्रस्तुत करना :- रेलवे बोर्ड के सर्कुलर, विभागीय आदेश, सुरक्षा निर्देश या सक्षम प्राधिकारी की उस मंजूरी की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराई जाए, जिसके तहत यह वर्तमान प्रक्रिया निर्धारित की गई है।

C. कानूनी अनुपालन का सत्यापन :- इस बात की लिखित पुष्टि की जाए कि डेटोनेटर को ले जाने, परिवहन करने और अपने पास रखने की वर्तमान पद्धति, ‘एक्सप्लोसिव्स एक्ट, 1884′, ‘एक्सप्लोसिव्स रूल्स, 2008′, रेलवे बोर्ड के 17.08.2004 के पत्र और अन्य लागू निर्देशों के प्रावधानों का पालन करती है या नहीं।

D. यात्री ट्रेनों में ले जाने की जांच :- यात्री कोचों में या यात्रियों के बीच डेटोनेटर ले जाने की प्रथा की विशेष जांच की जाए। इसमें यह भी देखा जाए कि क्या इसके लिए कोई कानूनी छूट, निर्धारित शर्तें या सक्षम प्राधिकारी की कोई अधिकृत अनुमति मौजूद है।

E. रनिंग रूम/रेस्ट रूम में रखने की व्यवस्था की जांच :- आराम के समय (रेस्ट पीरियड) डेटोनेटर को जहां रखा जाता है, उस व्यवस्था की तत्काल समीक्षा की जाए। इसमें उनका भंडारण, कस्टडी, उन तक पहुंच का नियंत्रण, उन्हें सौंपना, वापस करना और इसके लिए जवाबदेही तय करना शामिल है।

F. अंतरिम सुरक्षा व्यवस्था :- उपरोक्त समीक्षा पूरी होने तक, प्रशासन को कुछ उचित अंतरिम व्यवस्थाओं पर विचार करना चाहिए। इसका उद्देश्य डेटोनेटर को असुरक्षित या अनधिकृत तरीके से अपने पास रखने या ले जाने से रोकना है। साथ ही, यह सुनिश्चित किया जाए कि यदि कानूनी रूप से डेटोनेटर ले जाना आवश्यक है, तो वह केवल एक अधिकृत प्रक्रिया के माध्यम से और सभी लागू शर्तों को पूरा करते हुए ही किया जाए।

G. प्रतिशोधात्मक कार्रवाई से सुरक्षा :- संबंधित अधिकारियों को लिखित निर्देश दिया जाए कि सुरक्षा से जुड़ी वास्तविक चिंताओं का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जाए। किसी भी कर्मचारी के खिलाफ केवल इसलिए कोई मनमानी या प्रतिशोधात्मक अनुशासनात्मक कार्रवाई न की जाए, क्योंकि उसने ऐसी चिंताएं उठाई हैं या लागू कानूनी नियमों के बारे में स्पष्टीकरण मांगा है।

H. लिखित जवाब और समयबद्ध समाधान :- इस ज्ञापन में उठाए गए मुद्दों पर तर्कपूर्ण लिखित जवाब दिया जाए, जिसमें प्रस्तावित या लागू किए गए सुधारात्मक उपायों का विवरण भी शामिल हो।

8. सक्षम प्राधिकारियों की जिम्मेदारी

सेंट्रल रेलवे के महाप्रबंधक से अनुरोध है कि वे यह सुनिश्चित करें कि इस मामले की जांच उचित प्रशासनिक और सुरक्षा स्तरों पर की जाए।

आरपीएफ (RPF) के प्रधान मुख्य सुरक्षा आयुक्त से अनुरोध है कि वे सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की जांच करें, जो रेलवे सुरक्षा बल के अधिकार क्षेत्र और जिम्मेदारियों के अंतर्गत आते हैं।

महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक/अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (रेलवे) से अनुरोध है कि वे इस शिकायत पर सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) के अधिकार क्षेत्र के तहत विचार करें और लागू कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करें।

एसोसिएशन का अनुरोध है कि इस मामले को केवल एक सामान्य परिचालन संबंधी मुद्दा मानकर खारिज न किया जाए; बल्कि इसके लिए कानूनी ढांचे और ढुलाई तथा हिरासत की वास्तविक परिस्थितियों की जांच की जानी चाहिए।

9. अंतिम प्रस्तुति और अधिकारों का आरक्षण

AILRSA फिर से दोहराता है कि वह रेलवे सुरक्षा, यात्रियों की सुरक्षा और लोको रनिंग स्टाफ द्वारा अपने कर्तव्यों का कानूनी रूप से पालन सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

यह संगठन रेलवे के वैध कामकाज में कोई बाधा नहीं डालना चाहता। इसकी चिंता यह है कि कामकाज से जुड़े कर्तव्यों का पालन लागू कानूनों और तय सुरक्षा प्रक्रियाओं के दायरे में ही किया जाना चाहिए। ऐसा करते समय कर्मचारियों या यात्रियों को किसी अनावश्यक जोखिम में नहीं डाला जाना चाहिए, और न ही किसी कर्मचारी पर विस्फोटक सामग्री से जुड़ी ऐसी कोई अस्पष्ट या अनुचित जिम्मेदारी थोपी जानी चाहिए।

रेलवे बोर्ड का 17.08.2004 का पत्र, विस्फोटक पदार्थों से जुड़े मौजूदा कानून, और जीवन तथा व्यक्तिगत सुरक्षा के संवैधानिक अधिकार को देखते हुए, इस मुद्दे की सावधानीपूर्वक, लिखित और तर्कपूर्ण जांच की जानी चाहिए।

इसलिए, इस प्रस्तुति को निम्नलिखित रूप में माना जाएगा:

  1. सुरक्षा और कानूनी मामलों से जुड़ी एक औपचारिक शिकायत;
  2. वैधानिक और प्रशासनिक प्राधिकरणों के सत्यापन के लिए एक अनुरोध;
  3. एसोसिएशन की सुरक्षा संबंधी जायज़ आपत्तियों का एक पूर्व-रिकॉर्ड; और
  4. एक औपचारिक सूचना कि एसोसिएशन के पास यह अधिकार सुरक्षित है कि वह इस दस्तावेज़ और इस पर मिलने वाले जवाब (या जवाब न मिलने की स्थिति) को, जहाँ भी कानूनी रूप से आवश्यक हो, संबंधित विभागीय, वैधानिक या न्यायिक मंच के समक्ष रिकॉर्ड पर रख सके।

एसोसिएशन अनुरोध करती है कि इस दस्तावेज़ की प्राप्ति की पुष्टि की जाए और जल्द से जल्द तर्कपूर्ण लिखित जवाब दिया जाए।

दिनांक : 22.10.2026

स्थान : मुंबई

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