कामगार एकता कमिटी संवाददाता की रिपोर्ट
संयुक्त किसान मोर्चा, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर 27 अप्रैल 2026 को किसानों ने लखनऊ में जोरदार प्रदर्शन कर निम्नलिखित माँगें उठाईं:
- प्रीपेड स्मार्ट मीटर योजना वापिस ली जाए;
- बिजली के निजीकरण की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए;
- बेमौसम बरसात से बर्बाद फसलों का मुआवजा दिया जाए;
- नोएडा सहित अन्य क्षेत्रों में मजदूरों की जायज मांगों को मन जाए;
- आंदोलनरत मजदूरों पर हो रहे पुलिस दमन को तुरंत बंद किया जाए।
किसानों ने ऐलान किया कि प्रदेश सरकार की बिजली नीति पूरी तरह जनविरोधी है और इससे किसानों, मजदूरों तथा आम उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है।
किसानों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार शीघ्र ही इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो प्रदेशभर में व्यापक और चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए, विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक इंजीनियर शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि प्रदेश में पिछले 500 से अधिक दिनों से बिजली के निजीकरण के खिलाफ कर्मचारी आंदोलनरत हैं। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ कर्मचारियों का नहीं, बल्कि किसानों, मजदूरों और आम उपभोक्ताओं के हितों का संघर्ष है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि बिजली व्यवस्था निजी हाथों में जाती है, तो इससे बिजली दरों में भारी वृद्धि होगी और ग्रामीण तथा गरीब उपभोक्ताओं की पहुंच से बिजली दूर हो जाएगी। इसलिए सभी वर्गों को मिलकर इस नीति का विरोध करना होगा।
अन्नदाता किसान यूनियन के नेता ने कहा कि आज का आंदोलन किसान, मजदूर और कर्मचारी एकता का प्रतीक है। यह संघर्ष केवल किसी एक वर्ग का नहीं, बल्कि आम जनता के अधिकारों और संसाधनों की रक्षा का संघर्ष है। आने वाले समय में इस एकजुटता को और मजबूत किया जाएगा।
क्रांतिकारी किसान यूनियन के नेताओं ने कहा कि प्रीपेड स्मार्ट मीटर योजना प्रदेश में पूरी तरह असफल साबित हुई है। इससे उपभोक्ताओं को राहत मिलने के बजाय अनावश्यक आर्थिक बोझ बड़ा है। उपभोक्ताओं को अनेक तकनीकी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों ने मांग की कि सरकार तुरंत इस योजना को समाप्त करे और पूर्व की पोस्टपेड एवं सरल मीटरिंग व्यवस्था को बहाल करे।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों एवं कार्यकर्ताओं ने भाग लिय।
