फ़ॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ़ इंडिया (FSUI) की प्रेस विज्ञप्ति

फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया (FSUI) द्वारा CITU सेंटर के सहयोग से
प्रेस विज्ञप्ति
ईरान–इज़राइल–अमेरिका संघर्ष में मारे गए भारतीय नाविकों के परिवारों ने न्याय और सुरक्षा की मांग की
नई दिल्ली, 21 जुलाई 2026
फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया (FSUI) ने CITU सेंटर के सहयोग से आज नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की, जिसमें ईरान–इज़राइल–अमेरिका के जारी संघर्ष में मारे गए भारतीय नाविकों के शोकाकुल परिवारों ने भाग लिया। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उच्च जोखिम वाले संघर्ष क्षेत्रों में कार्यरत भारतीय नाविकों की गंभीर सुरक्षा चिंताओं को उजागर किया गया और भारत सरकार तथा अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल कार्रवाई की मांग की गई।
हाल के महीनों में 11 से अधिक भारतीय नाविकों ने वाणिज्यिक जहाजों पर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए अपने प्राण गंवाए हैं। उनके परिवारों को असहाय छोड़ दिया गया है और वे कंपनियों द्वारा दिए जाने वाले अपर्याप्त मुआवज़े पर निर्भर हैं, जो अभी तक प्राप्त भी नहीं हुआ है। FSUI वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाए जाने की कड़ी निंदा करता है और यह इंगित करता है कि ये हत्याएं भारतीय चालक दल की राष्ट्रीयता की पूरी जानकारी होने के बावजूद की गईं।
नाविक वे प्रमुख कर्मी हैं जो वैश्विक व्यापार को जीवित रखते हैं। वे भू-राजनीतिक युद्धों में बलि का बकरा नहीं हैं। IMO के महासचिव और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव की प्रतिक्रियाएं अपर्याप्त हैं। हमारी अपनी सरकार भी इन बहादुर भारतीय नाविकों के सर्वोच्च बलिदान को पर्याप्त रूप से मान्यता देने में विफल रही है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य की स्थिति अब भी तनावपूर्ण बनी हुई है, और यूक्रेन–रूस संघर्ष के कारण अब इसी प्रकार के खतरे काला सागर में भी उभर रहे हैं, जिनका जोखिम बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य तक फैल रहा है।
यद्यपि डीजी शिपिंग ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य से बचने संबंधी परामर्श जारी किए हैं, लेकिन यह व्यावहारिक समाधान नहीं है, क्योंकि इससे विदेशी ध्वज वाले जहाजों पर कार्यरत हजारों भारतीय नाविकों की आजीविका पर संकट आ जाता है। भारत सरकार ने इन हत्याओं के विरुद्ध पर्याप्त रूप से मजबूत आवाज़ नहीं उठाई है और न ही पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बात पर भी जोर दिया गया कि UNCLOS के तहत नौवहन की स्वतंत्रता कमजोर पड़ रही है, और जिन देशों ने सुरक्षित समुद्री मार्ग तथा नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता जताई है, वे अपनी जिम्मेदारियां निभाने में विफल रहे हैं।
FSUI और परिवारों की मांगें:
- भारत सरकार तत्काल संयुक्त राष्ट्र में भारतीय नाविकों की हत्या के विरुद्ध एक आधिकारिक याचिका दायर करे और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में सुरक्षित नौवहन की गारंटीकृत स्वतंत्रता की मांग करे।
- प्रत्येक मृतक नाविक के परिवार को संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान (या जिम्मेदार पक्षों) की ओर से कम से कम 50 लाख अमेरिकी डॉलर (USD 5 Million) का पर्याप्त मुआवज़ा दिया जाए।
- केंद्र और राज्य सरकारें शोकाकुल परिवारों को पर्याप्त सहायता प्रदान करें, जिसमें शामिल हो:
– प्रत्येक परिवार को ₹1 करोड़ की अनुग्रह राशि (एक्स-ग्रेशिया)।
– परिवार के एक आश्रित सदस्य को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी।
– हमलों में मारे गए नाविकों को शहीद का दर्जा प्रदान किया जाए।
– भारतीय नौसेना, वायु सेना, तटरक्षक बल, विदेश मंत्रालय (MEA), खुफिया एजेंसियों तथा नाविक प्रतिनिधियों (FSUI) सहित संबंधित पक्षों को सम्मिलित करते हुए एक समर्पित संकट प्रबंधन टीम का तत्काल गठन किया जाए, जो ऐसी समुद्री आपात स्थितियों में प्रथम प्रतिक्रिया इकाई के रूप में कार्य करे।
FSUI पुनः दोहराता है कि भारतीय नाविकों को उपयोग के बाद छोड़ देने योग्य नहीं समझा जाना चाहिए। हम न्याय, सम्मान और दीर्घकालिक सुरक्षा की उनकी लड़ाई में परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं।
FSUI अपनी मुहिम को कानूनी, कूटनीतिक और जन-आंदोलन के माध्यमों से जारी रखेगा, जिसमें ILO, IMO, संयुक्त राष्ट्र और माननीय प्रधानमंत्री के समक्ष प्रतिनिधित्व भी शामिल होगा।
हम न्याय की मांग करते हैं। हम सुरक्षा की मांग करते हैं। हम अपने नाविकों के सम्मान की मांग करते हैं।
मनोज यादव
महासचिव
