कामगार एकता कमिटी के संवाददाता की रिपोर्ट

गुरुवार 9 जुलाई को महाराष्ट्र भर में हज़ारों शिक्षकों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के लिए शिक्षकों को बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के रूप में नियुक्त किए जाने के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया।
मुंबई के आज़ाद मैदान में इस तरह के सबसे बड़े आंदोलनों में से एक आयोजित हुआ, जहां राज्य शिक्षा विभाग द्वारा वेतन कटौती की चेतावनी दिए जाने के बावजूद शहर भर से लगभग 2,000 शिक्षक, गैर-शिक्षण कर्मचारी, प्राचार्य और स्कूल प्रबंधन के प्रतिनिधी एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि शिक्षकों को पढ़ाने की तुलना में चुनावी कार्यों में अधिक समय देना पड़ रहा है, जिससे विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। यूनियनों का कहना है कि इस प्रशासनिक काम में कक्षाओं का क़ीमती समय बर्बाद होता है।
पहले से ही राज्य में जिला परिषद स्कूलों में 37,000 से ज़्यादा शिक्षकों की कमी है। 9,200 से ज़्यादा स्कूल सिर्फ़ एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। एक ही शिक्षक को एक साथ कई कक्षाएं संभालनी पड़ती हैं, जिससे छात्रों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ता है। रिक्तियां जानबूझकर नहीं भरी जा रही हैं और ठेके पर बहुत ही कम वेतनों पर शिक्षकों से काम करवाया जाता है। नतीजतन टीचर-ट्रेनिंग कोर्स में दाखिले में भारी गिरावट आई है; डिप्लोमा इन एजुकेशन (DEd) की सिर्फ़ 24 प्रतिशत सीटें ही भरी हैं। इसका मतलब है कि कम नए शिक्षक इन सेवाओं की तरफ आकर्षित हो रहे हैं।
मुख्य मांगें:
- पहले से ही सेवा में कार्यरत शिक्षकों के लिए अनिवार्य शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की शर्त वापस लें;
- चुनाव संबंधी ड्यूटी से इनकार करने वाले शिक्षकों के ख़िलाफ़ दर्ज़ एफआईआर को तत्काल रद्द करें;
- BLO और SIR ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दें;
- स्कूलों में नियमित पूर्ण-दिवसीय समय-सारिणी फिर से लागू की जाए।
कामगार एकता कमिटी ने हमेशा से ही शिक्षकों के संघर्षों को समर्थन दिया है। उनकी यह सभी मांगें बहुत ही जायज़ हैं। शिक्षकों के मूल प्रश्नों को हल किये बिना विद्यार्थियों का भविष्य अंधकारमय होगा। यह बहुत ही ज़रूरी है कि फ़ौरन शिक्षकों को अन्य सभी अतिरिक्त कामों से मुक्त किया जाये और विद्यार्थियों की शिक्षा और उनके विकास की ओर उनका प्रथम कर्तव्य हो।
