ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन का आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र

(अंग्रेजी पत्र का अनुवाद)

सेवा में,
माननीय मुख्यमंत्री,
आंध्र प्रदेश सरकार,
अमरावती, आंध्र प्रदेश।
विषय: अमरावती राजधानी शहर में बिजली वितरण नेटवर्क की स्थापना और संचालन तथा खुदरा बिजली आपूर्ति के वितरण के लिए APCRDA द्वारा जारी ‘एक्सप्रेशन ऑफ़ इंटरेस्ट‘ पर पावर इंजीनियरों द्वारा कड़ी आपत्ति – ‘एक्सप्रेशन ऑफ़ इंटरेस्ट को वापस लेने/स्थगित करने और यह काम मौजूदा सरकारी बिजली कंपनी (APCPDCL) को सौंपने का अनुरोध – संबंध में।
संदर्भ: 1. अमरावती राजधानी शहर में बिजली वितरण नेटवर्क की स्थापना और संचालन तथा बिजली के वितरण / खुदरा आपूर्ति के लिए APCRDA का एक्सप्रेशन ऑफ़ इंटरेस्ट, सितंबर 2026।
2. इस विषय पर APSEB इंजीनियर्स एसोसिएशन, विजयवाड़ा द्वारा माननीय मुख्यमंत्री को 21-09-2026 को दिया गया अभ्यावेदन।
आदरणीय महोदय,
ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन, जो देश भर में राज्य और केंद्रीय विद्युत उपयोगिताओं के विद्युत इंजीनियरों और कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाला सर्वोच्च राष्ट्रीय निकाय है, जिसमें इसकी आंध्र प्रदेश की घटक संस्था APSEB इंजीनियर्स एसोसिएशन भी शामिल है, उपर्युक्त विषय में आपके महामहिम के व्यक्तिगत और तत्काल हस्तक्षेप का अनुरोध करते हुए यह अभ्यावेदन सादर प्रस्तुत करता है।
सर्वप्रथम, ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन अमरावती को विश्व-स्तरीय राजधानी शहर के रूप में विकसित करने के लिए अपना पूर्ण समर्थन दर्ज करता है और इसके निवासियों के लिए आधुनिकीकरण, स्मार्ट-ग्रिड प्रौद्योगिकी तथा विश्वसनीय सप्ताह के चौबीसों घंटे विद्युत आपूर्ति का स्वागत करता है। हमारी आपत्ति विशेष रूप से और केवल राजधानी शहर में विद्युत के वितरण और खुदरा आपूर्ति का दायित्व मौजूदा सरकारी स्वामित्व वाली विद्युत उपयोगिताओं के स्थान पर APCRDA निविदा/ एक्सप्रेशन ऑफ़ इंटरेस्ट के माध्यम से किसी निजी संस्था को सौंपने के प्रस्ताव को लेकर है।
ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन आपके महामहिम के ध्यान में कृपापूर्वक निम्नलिखित बिंदु लाना चाहता है:
1. विद्युत क्षेत्र राज्य और राष्ट्र के आर्थिक और औद्योगिक विकास का प्रमुख प्रेरक है। आंध्र प्रदेश पावर यूटिलिटीज की दक्षता, विश्वसनीयता और परिचालन मानक लगातार पॉवर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड और नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन जैसे प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के संगठनों के तुलनीय रहे हैं जो राज्य की मजबूत तकनीकी और संस्थागत क्षमता का प्रतिबिंब है।
2. माननीय मुख्यमंत्री श्री एन. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में, आंध्र प्रदेश देश के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले विद्युत क्षेत्रों में से एक के रूप में उभरा है। यह आंध्र प्रदेश विद्युत् सेवा के इंजीनियरों, श्रमिकों और कर्मचारियों की दशकों की समर्पित सेवा, तकनीकी विशेषज्ञता और अटूट प्रतिबद्धता से संभव हुआ है।
3. विशाखापत्तनम में चक्रवात हुदहुद से हुई तबाही के दौरान, विद्युत सेवा के इंजीनियरों, ऑपरेशन और मेंटेनेंस कर्मचारियों और अन्य कर्मचारियों ने पारेषण और वितरण अवसंरचना को हुए व्यापक नुकसान के बावजूद आपूर्ति बहाल करने के लिए युद्धस्तर पर चौबीसों घंटे काम किया। यह इस बात का प्रमाण है कि सरकारी विद्युत यूटिलिटीज हर संकट में लोगों के साथ खड़ी रहती हैं, चाहे काम के घंटे कितने भी हों या व्यक्तिगत कठिनाई कितनी भी हो — ऐसी प्रतिबद्धता की निजी, लाभ-प्रेरित वितरण लाइसेंसधारी से समान स्तर पर अपेक्षा नहीं की जा सकती।
4. अमरावती, आंध्र प्रदेश की राजधानी, राज्य के लोगों का स्वप्न शहर और उनके गौरव और आकांक्षाओं का प्रतीक है। शासन के केंद्र के रूप में, इसकी आवश्यक सार्वजनिक अवसंरचना — जिसमें विद्युत वितरण भी शामिल है — आंध्र प्रदेश सरकार के संरक्षण में रहनी चाहिए। विद्युत का वितरण और खुदरा आपूर्ति केवल वाणिज्यिक गतिविधियाँ नहीं हैं बल्कि विश्वसनीयता, सुरक्षा, जवाबदेही और दीर्घकालिक सार्वजनिक हित से संबंधित महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवाएँ हैं, और इन्हें विद्युत अधिनियम, 2003 के वैधानिक ढाँचे के अनुसार सरकार के स्वामित्व वाली विद्युत् सेवा द्वारा ही जारी रखा जाना चाहिए।
5. APCRDA संबंधित इकाई द्वारा पहले APERC से वितरण लाइसेंस प्राप्त किए बिना सीधे वितरण और खुदरा आपूर्ति के अधिकार प्रदान नहीं कर सकता, जैसा कि विद्युत अधिनियम, 2003 के तहत अनिवार्य है। विद्युत के वितरण और खुदरा आपूर्ति का व्यवसाय केवल अधिनियम की धाराओं 14, 15 और 16 के तहत APERC द्वारा विधिवत अनुमोदित वितरण लाइसेंसधारी द्वारा ही किया जा सकता है। APCRDA स्वयं किसी निविदा या रियायत समझौते के माध्यम से ऐसे वैधानिक अधिकार प्रदान नहीं कर सकता, और एक्सप्रेशन ऑफ़ इंटरेस्ट अधिक से अधिक एक खोजपरक प्रक्रिया है जो स्वयं किसी वितरण प्रणाली की स्थापना या संचालन का कोई अधिकार या पात्रता सृजित नहीं कर सकती।
6. APERC ने पहले ही राज्य वितरण कंपनियों को उनके संबंधित लाइसेंस प्राप्त क्षेत्रों के लिए वितरण और खुदरा आपूर्ति लाइसेंस प्रदान किए हैं। APCPDCL एनटीआर, कृष्णा, गुंटूर, पलनाडु, बापटला, मार्कापुरम और प्रकाशम जिलों के लिए वितरण लाइसेंसधारी है, जिसमें अमरावती क्षेत्र शामिल है, और इसने वितरण दक्षता, नेटवर्क विकास और उपभोक्ता सेवा में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है — जिसमें व्यवस्थित रखरखाव के माध्यम से वितरण ट्रांसफॉर्मर (DTR) की विफलता दर में उल्लेखनीय कमी, तथा 33/11 kV सबस्टेशनों और 33kV, 11kV और LT नेटवर्क का निरंतर विस्तार शामिल है। इस सिद्ध तकनीकी क्षमता और परिचालन दक्षता को देखते हुए, अमरावती राजधानी शहर में विद्युत का वितरण और खुदरा आपूर्ति APCPDCL को सौंपी जानी चाहिए, जिससे सार्वजनिक स्वामित्व बना रहे, जवाबदेही सुनिश्चित हो और आंध्र प्रदेश के लोगों के दीर्घकालिक हितों की रक्षा हो।
7. अमरावती में एक अलग/समानांतर वितरण व्यवस्था के निर्माण के लिए मौजूदा लाइसेंस प्राप्त आपूर्ति क्षेत्र, अवसंरचना, उपभोक्ता आधार, पहले से किए गए सार्वजनिक निवेश, विद्युत खरीद, पारेषण-वितरण इंटरफेस, टैरिफ और क्रॉस-सब्सिडी के प्रभाव, उपभोक्ता अधिकारों और मौजूदा परिसंपत्तियों तथा कर्मचारियों के प्रबंधन की भी पूर्व जांच आवश्यक होगी। इससे सबस्टेशनों, फीडरों, मीटरिंग, बिलिंग, ऑपरेशन और मेंटेनेंस और ग्राहक-सेवा अवसंरचना की अनावश्यक पुनरावृत्ति भी हो सकती है, और परिणामस्वरूप पूंजीगत व्यय की अपव्ययी वृद्धि हो सकती है।
8. राज्य विद्युत उपयोगिताओं ने दशकों में निर्मित नेटवर्कों, सबस्टेशनों, ट्रांसफॉर्मरों, फीडरों, मीटरों, भवनों, वाहनों, उपकरणों, आईटी प्रणालियों और मानव संसाधनों में पर्याप्त सार्वजनिक संसाधनों का निवेश किया है। किसी भी सार्वजनिक परिसंपत्ति को पारदर्शी मूल्यांकन, वैधानिक अनुमोदन, नियामकीय जांच और सार्वजनिक हित की प्रदर्शनीय सुरक्षा के बिना किसी निजी इकाई को हस्तांतरित, पट्टे पर, लाइसेंस, रियायत या अन्यथा उसके निपटान में नहीं रखा जाना चाहिए। चूंकि अमरावती को एक प्रमुख प्रशासनिक, वाणिज्यिक और आर्थिक केंद्र के रूप में परिकल्पित किया गया है, इसलिए इस संभावित उच्च-मूल्य वाले उपभोक्ता आधार को मौजूदा वितरण कंपनियों से अलग करने से उसकी वित्तीय स्थिरता, जिसमें उसकी क्रॉस- सब्सिडी दायित्व और ग्रामीण वितरण लागत शामिल हैं, गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है — इसलिए कोई भी अगला कदम उठाने से पहले एक स्वतंत्र वित्तीय प्रभाव आकलन आवश्यक है।
9.एक्सप्रेशन ऑफ़ इंटरेस्ट के अंतर्निहित आधुनिकीकरण उद्देश्यों — स्मार्ट-ग्रिड प्रणालियां, स्मार्ट मीटरिंग, स्काडा /DMS, GIS और स्वचालन — को मौजूदा राज्य विद्युत उपयोगिताओं के माध्यम से समान रूप से, और अधिक सुरक्षित रूप से, प्राप्त किया जा सकता है, जिनके पास पहले से ही आवश्यक संस्थागत ढांचा, तकनीकी विशेषज्ञता, बुनियादी ढांचा और अनुभवी कार्यबल मौजूद है। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन का प्रस्तुतिकरण है कि अमरावती को इसके बजाय मौजूदा विद्युत उपयोगिताओं के माध्यम से एक मॉडल स्मार्ट विद्युत वितरण शहर के रूप में विकसित किया जा सकता है, जिसमें उपयुक्त निवेश और प्रौद्योगिकी उन्नयन शामिल हों, जैसे स्मार्ट मीटरिंग, जहां संभव हो भूमिगत केबलिंग, GIS, स्काडा /DMS, नवीकरणीय-ऊर्जा एकीकरण, EV चार्जिंग बुनियादी ढांचा, ऊर्जा भंडारण और उन्नत उपभोक्ता सेवाएं। आधुनिकीकरण का अर्थ निजीकरण होना न तो आवश्यक है, और न ही ऐसा होना चाहिए।
10. एक्सप्रेशन ऑफ़ इंटरेस्ट संभावित निजी आवेदकों के लिए विस्तृत पात्रता मानदंड निर्धारित करता है लेकिन मौजूदा विद्युतक्षेत्र इंजीनियरों, मजदूरों, पेंशनभोगियों और ठेका कर्मियों के वैध हितों की सुरक्षा के लिए किसी समान ढाँचे पर मौन है। प्रस्ताव से उत्पन्न होने वाला कोई भी पुनर्गठन उन कर्मचारियों के अधिकार-क्षेत्र, जनशक्ति आवश्यकताओं, पदोन्नति के अवसरों, स्थानांतरण, भर्ती, पदों और पेंशन संबंधी लाभों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है, जिनके पास प्रणाली संचालन, रखरखाव, आपातकालीन बहाली, विद्युत सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और उपभोक्ता सेवा में विशेषीकृत अनुभव है — ऐसा अनुभव जिसे वाणिज्यिक पुनर्गठन की कवायद में महज एक चर के रूप में नहीं माना जा सकता। कोई भी पुनर्गठन औपचारिक कर्मचारी-प्रभाव आकलन और सेवा शर्तों, वरिष्ठता, पदोन्नतियों तथा पेंशन संबंधी लाभों की कानूनी रूप से प्रवर्तनीय सुरक्षा के बिना नहीं किया जाना चाहिए।
11. APCRDA क्षेत्र में बिजली वितरण और खुदरा आपूर्ति के प्रस्तावित निजीकरण ने आंध्र प्रदेश विद्युत् सेवा के इंजीनियरों, मजदूरों और कर्मचारियों के बीच व्यापक और वास्तविक चिंता पैदा कर दी है, जिनके योगदान को माननीय मुख्यमंत्री स्वयं कई अवसरों पर स्वीकार कर चुके हैं। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन सम्मानपूर्वक प्रस्तुत करता है कि राजधानी शहर में निजीकरण की दिशा में कोई भी कदम देशभर के कर्मचारियों के बीच कड़े विरोध और औद्योगिक अशांति को जन्म देने की संभावना रखता है, क्योंकि यह सार्वजनिक विद्युत क्षेत्र और उसके कार्यबल के हितों को सीधे प्रभावित करता है। उपर्युक्त के मद्देनज़र, ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन आंध्र प्रदेश सरकार से सम्मानपूर्वक अनुरोध करता है कि:
12. APCRDA एक्सप्रेशन ऑफ़ इंटरेस्ट को तत्काल स्थगित रखें और संबंधित प्राधिकरण को व्यापक जनहित में निविदा रद्द करने का निर्देश दें;
13. विद्युत अधिनियम, 2003 के अनुसार, सरकारी स्वामित्व वाली वितरण उपयोगिता, APCPDCL, के माध्यम से अमरावती राजधानी शहर में बिजली के वितरण और खुदरा आपूर्ति को जारी रखें;
14. APCRDA को अमरावती में बिजली वितरण के लिए चयन, रियायत, पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप, संयुक्त उद्यम, फ्रेंचाइज़ी या किसी अन्य व्यवस्था के साथ तब तक आगे न बढ़ने का निर्देश दें, जब तक उचित परीक्षण के बाद अंतिम सरकारी नीतिगत निर्णय नहीं लिया जाता;
15. प्रस्ताव की विद्युत अधिनियम, 2003, मौजूदा वितरण लाइसेंसों और APERC नियामक ढांचे के साथ संगतता पर व्यापक कानूनी राय प्राप्त करें;
16. आगे कोई कार्रवाई किए जाने से पहले मौजूदा वितरण कंपनियों और राज्य विद्युत क्षेत्र को शामिल करते हुए एक स्वतंत्र कानूनी, नियामक, वित्तीय, तकनीकी और सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रभाव आकलन कराएं;
17. मौजूदा राज्य विद्युत उपयोगिताओं को अमरावती को एक आधुनिक, स्मार्ट और विश्वस्तरीय बिजली वितरण क्षेत्र के रूप में विकसित करने का पहला अवसर दें;
18. ऊर्जा विभाग के अधीन एक उच्च-स्तरीय समिति गठित करें, जिसमें संबंधित वैधानिक प्राधिकरणों/उपयोगिताओं और ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन सहित मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों का प्रतिनिधित्व हो, ताकि प्रस्ताव की व्यापक जांच की जा सके;
19. मौजूदा बिजली उपयोगिताओं और उनके कर्मचारियों को प्रभावित करने वाले किसी भी नीतिगत निर्णय से पहले ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन और उसके आंध्र प्रदेश घटक APSEB इंजीनियर्स एसोसिएशन सहित मान्यता प्राप्त ट्रेड यूनियनों और कर्मचारी महासंघों के साथ सार्थक और पूर्व परामर्श सुनिश्चित करें;
20. सुनिश्चित करें कि प्रस्ताव से उत्पन्न किसी भी पुनर्गठन के कारण कोई इंजीनियर, कर्मचारी, पेंशनभोगी या आउटसोर्सिंग कर्मचारी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रतिकूल रूप से प्रभावित न हो;
21. EOI पर आगे कोई कार्रवाई किए जाने से पहले ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन और इसके आंध्र प्रदेश घटक APSEB इंजीनियर्स एसोसिएशन के साथ विस्तृत चर्चा का अवसर प्रदान करें।
ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन विश्वस्तरीय राजधानी शहर के रूप में अमरावती के विकास और आधुनिकीकरण का पूर्ण समर्थन करता है; हालांकि, आधुनिकीकरण का अर्थ यह आवश्यक रूप से न तो होना चाहिए, और न ही होना चाहिए कि बिजली वितरण जैसी आवश्यक सार्वजनिक सेवा का निजीकरण किया जाए।
मौजूदा राज्य विद्युत उपयोगिताओं के पास अमरावती राजधानी को अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी से ऊर्जीकृत करने के लिए आवश्यक संस्थागत ढांचा, बुनियादी ढांचा और तकनीकी रूप से अनुभवी कार्यबल मौजूद है, साथ ही सार्वजनिक स्वामित्व को बनाए रखते हुए उपभोक्ताओं और कर्मचारियों दोनों के दीर्घकालिक हितों की रक्षा करने की क्षमता भी है।
हम आपसे बड़े जनहित में व्यक्तिगत और तत्काल हस्तक्षेप करने का विनम्रतापूर्वक अनुरोध करते हैं, ताकि APCRDA एक्सप्रेशन ऑफ़ इंटरेस्ट को स्थगित/वापस लिया जाए और अमरावती राजधानी शहर में बिजली का वितरण और खुदरा आपूर्ति सरकार के स्वामित्व वाली विद्युत उपयोगिताओं द्वारा ही जारी रखी जाए।
आपको धन्यवाद और हर समय हमारे पूर्ण सहयोग का आश्वासन।
सादर,

शैलेन्द्र दुबे
अध्यक्ष
प्रतिलिपि प्रेषित:
1. माननीय उप मुख्यमंत्री, आंध्र प्रदेश सरकार, अमरावती —
कृपया हस्तक्षेप हेतु।
2. माननीय ऊर्जा मंत्री, आंध्र प्रदेश सरकार, अमरावती — कृपया
हस्तक्षेप हेतु।
3. मुख्य सचिव, आंध्र प्रदेश सरकार, अमरावती।
4. विशेष मुख्य सचिव, ऊर्जा विभाग, आंध्र प्रदेश सरकार,
अमरावती।
5. अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, APCPDCL, विजयवाड़ा — सूचना एवं
आवश्यक कार्रवाई हेतु।
6. आयुक्त, APCRDA, तूल्लूरु मंडल, अमरावती
