मज़दूर एकता कमेटी के संवाददाता की रिपोर्ट

मज़दूर एकता कमेटी (एमईसी) ने 3 अक्तूबर, 2026 को दक्षिण दिल्ली के ओखला औद्योगिक क्षेत्र फेस-2 में एक जनसभा का आयोजन किया। इस जनसभा का विषय था – ‘सम्मान से जीवन जीने लायक वेतन के लिये संघर्ष करें!’
इससे 3 महीने पहले से मज़दूर एकता कमेटी सम्मान से जीवन जीने लायक वेतन पर ज़ोरदार अभियान चलाती आ रही है। इस अभियान के दौरान मज़दूरों को अपने अधिकारों के बारे में जागृत किया जा रहा है। अभियान के दौरान हज़ारों की संख्या में पर्चें बांटे गये और नुक्कड़ सभाएं की गईं।
जनसभा के स्थल को बैनरों तथा प्लाकार्डों से सज़ाया गया था, जिन पर मज़दूरों की मांगें लिखी थीं – ‘अपनी रोज़ी-रोटी और अधिकारों की रक्षा के लिये संघर्ष को और तेज़ करें!’, ‘सुरक्षित रोज़गार और इज़्ज़त की ज़िन्दगी चाहिये!’, ‘मज़दूर-विरोधी चार लेबर कोड रद्द करो!’, ‘महंगाई और बेराज़गारी के खि़लाफ़ संघर्ष तेज़ करें!’, ‘न्यूनतम वेतन न देने वाले अपराधी मालिकों को सज़ा दो!’
जनसभा में फैक्ट्री मज़दूरों, आईटी मज़दूरों, गारमेंट मज़दूरों, महिला मज़दूरों, युवाओं और ई-रिक्शा यूनियन के कर्मियों ने हिस्सा लिया। सभा के दौरान कई लोग मज़दूर एकता कमेटी के सदस्य भी बने।
जनसभा का संचालन कॉमरेड धर्मेन्द्र कुमार ने किया।
मज़दूर एकता कमेटी के वक्ता कॉमरेड संतोष कुमार ने समझाया कि सम्मान से जीने लायक वेतन का मतलब है ऐसा वेतन, जिससे मज़दूर का परिवार सिर्फ ज़िंदा ही न रहे, बल्कि उन्हें पोषण युक्त भोजन, सही आवास, बच्चों के लिए बढ़िया शिक्षा और बीमार होने पर इलाज मिल सके।
लेकिन आज दिल्ली के अधिकतम मज़दूरों को न्यूनतम वेतन भी नहीं मिल रहा है। न्यूनतम से कम वेतन देकर पूंजीपति मालिकों द्वारा, दिल्ली के 46 लाख मज़दूरों से लगभग 20 अरब रुपये की लूट की जा रही है। मज़दूरों का जीवन नरकीय बन गया है।

उन्होंने समझाया कि सरमायदार शारीरिक श्रम करने वाले और मानसिक श्रम करने वाले मज़दूरों को आपस में बांटने की कोशिश करते हैं। लेकिन मज़दूर एकता कमेटी का यह मानना है कि जो भी अपना श्रम – शारीरिक या मानसिक – बेचकर, वेतन कमाकर गुज़ारा करता है – हेल्पर, क्लीनर, पायलट, ड्राइवर, अकाउंटेंट, सुपरवाईजर, मैनेजर, इंजीनियर, शिक्षक, डॉक्टर, कम्प्यूटर ऑपरेटर, ब्लिंकिट, ओला, उबर, फिलिपकार्ट में काम करने वाले – वे सब मज़दूर हैं।
अंत में उन्होंने कहा कि आज 21वीं सदी में एक मज़दूर की ज़रूरत सिर्फ़ रोटी, कपड़ा और मकान तक सीमित नहीं है। अच्छी शिक्षा, अच्छा इलाज, बिजली, पानी, यातायात, मोबाइल फोन-इंटरनेट, आदि भी जीवन की मूलभूत ज़रूरतें हैं। सम्मान से जीने लायक न्यूनतम वेतन 42,000 रुपये होना चाहिये, जैसा कि हिन्दोस्तान के सभी मज़दूर संगठनों ने मांग की है।
उन्होंने आह्वान किया कि वेतन की आर्थिक लड़ाई को हमें राजनीतिक लड़ाई बनाना होगा। वेतन की लड़ाई को इतना तेज़ करना होगा ताकि वेतन की मांग को हमारे राजनेता विधानसभा व संसद में उठाने को मजबूर हों।
सभा के कई सहभागियों ने भी अपनी बातें रखीं। एमईसी के एक अन्य कार्यकर्ता ने कहा कि पूंजीवादी व्यवस्था ने देश के मज़दूरों को भुखमरी की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है। पूंजीपतियों की एक सरकार जाती है तो दूसरी आती है। लेकिन पूंजीपतियों की लूट का अजेंडा लगातार चलता रहता है। कई युवा मज़दूरों ने भी आज दिल्ली के फैक्ट्री मज़दूरों की दयनीय हालतों का वर्णन करते हुए, सम्मान से जीने लायक वेतन के लिए संघर्ष को तेज़ करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। मज़दूरों को जागृत करने वाली एक प्रेरणादायक कविता पेश की गयी, जिसने सभा में जोश भर दिया।
सभा में दिल्ली के मज़दूरों की ओर से एक ज्ञापन पेश किया गया, जिसे सर्वसम्मति से पास किया गया। यह ज्ञापन दिल्ली के श्रममंत्री को दिया जाएगा। इसमें मांग की गयी कि 42,000 रुपए प्रति माह का न्यूनतम वेतन सभी मज़दूरों के लिए सुनिश्चित किया जाये और इसका उल्लंघन करने वाले मालिकों को जेल की सज़ा दी जाये। समान काम का समान वेतन सुनिश्चित किया जाये, ठेके पर काम करवाना बंद किया जाये तथा सभी मज़दूरों को नियमित रोज़गार के साथ-साथ ओवरटाइम, ईएसआई, पीएफ़ और वृद्धावस्था पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं मुहैया कराई जायें। दिल्ली सरकार को चेतावनी दी गई कि इन मांगों पर जल्द से जल्द सुनवाई न होने पर आंदोलन को तेज़ किया जायेगा।
जोशीले नारों के साथ सभा का अंत हुआ।
