रेलवे के सिग्नल और टेलीकॉम कर्मचारी IRSTMU के नेत्रत्व में अपनी लंबित माँगों के 5 नवंबर को ‘टूल डाउन’ आंदोलन करेंगे

कामगार एकता कमिटी के संवाददाता की रिपोर्ट

भारतीय रेलवे में कार्यरत सिग्नल और टेलीकॉम (S&T) विभाग के कर्मचारी, रेल गाड़ियों के सुचारू चलन के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। गत कई वर्षों से उन्होंने कई महत्वपूर्ण माँगे, बड़े ही धीरज से रेल प्रशासन के सामने रखी हैंI

इंडियन रेलवे एस एंड टी मेंटेनर्स यूनियन (IRS&TMU) के महासचिव श्री अलोक चंद्र प्रकाश तथा राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नविन कुमार ने बताया कि उन्होंने इसी साल फिर एक बार रेलवे बोर्ड को उनका मांगपत्र पेश किया है (संलग्न), मगर अब तक न तो उन मसलों पर रेलवे प्रशासन ने कोई कदम उठाए हैं और न ही एस एंड टी मेंटेनर्स यूनियन को कोई जबाब भेजा हैI उन्होंने आगे बताया कि उनकी यूनियन और एक बार पत्र भेजेगी और अगर कोई कार्यवाही नहीं हुई तो सभी सिग्नल एंड टेलीकॉम कर्मचारी 5 नवंबर को, दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक टूल डाउन (काम बंद) आंदोलन करेंगेI ‘टूल डाउन’ आंदोलन के दौरान कर्मचारी अपने तय ब्रेक (लगभग 2 से 3 घंटे) के दौरान काम पूरी तरह ठप्प रखेंगेI

क्या इन कर्मचारियों की माँगे नाजायज हैं?

कर्मचारियों की मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:

रिस्क एंड हार्डशिप अलाउंस: 11 फरवरी 2019 को कमेटी का गठन होने के 7 साल बाद भी जोखिम और कठिनाई भत्ता लागू नहीं किया गया हैI

HOER नियमों का उल्लंघन: ‘आवर्स ऑफ एम्प्लॉयमेंट एंड पीरियड ऑफ रेस्ट रूल्स (HOER) 2005’ का पालन नहीं हो रहा हैI सिग्नल खराब होते ही कर्मचारियों को लगातार फोन कर परेशान किया जाता हैI कई बार तो कर्मचारी लंबी ड्यूटी खत्म करके घर पहुँचे ही होते हैं, कि उन्हें फिर वापिस बुलाया जाता हैI जरा सी देरी होने पर कर्मचारियों को चार्जशीट या चेतावनी पत्र थमा दिया जाता हैI

स्प्लिट ड्यूटी रोस्टर पर रोक: कर्मचारियों से 24 घंटे की शिफ्ट में नियमित 8-घंटे की ड्यूटी ली जाए और स्प्लिट ड्यूटी रोस्टर को तुरंत बंद किया जाए I

नाइट ड्यूटी फेलियर गैंग का गठन: रात्रि कालीन सिग्नल खराबी से निपटने के लिए अलग से गैंग का गठन किया जाएI

पदनाम में बदलाव: ‘टेक्निशियन सिग्नल’ को ‘सिग्नल इंटरलोकिंग मैनेजर’ और ‘टेक्निशियन टेलीकॉम’ को ‘टेलीकम्युनिकेशन मैनेजर’ का नया पदनाम दिया जाए I

हाई-स्पीड अलाउंस: लोको पायलटों की तरह S&T स्टाफ को भी हाई-स्पीड स्टैंडर्ड IV इंटरलोकिंग अलाउंस दिया जाए।

इन माँगों के अलावा और भी कई माँगे है जो आप पढ़ सकते है I (पी डी एफ देखिए)

कोई भी कह नहीं सकता की इनमें से एक माँग भी जायज नहीं हैI माँगे ऐसी हैं, जिन्हें कोई बहस के बिना मान लिया जाना चाहिए, क्योंकि वे एक इंसान लायक सम्मानपूर्वक जीवन के लिए आवश्यकतायें हैंI

इन माँगों को उजागर करने के लिए उन्होंने बड़े ही धीरज पूर्वक आंदोलन किया है, जैसे 4 बार “ब्लैक डे” ( 27 सितंबर 2016 , 9 फ़रवरी 2019, 9 फ़रवरी 2022, 14 मार्च 2024) और फिर 24 जून 2026 को “डिमांड डे” मनाना, मगर रेल प्रशासन के कानों तक ज्यू नहीं रेंगीI

इन माँगों को नजरअंदाज करना केवल इन कर्मचारियों को ही नहीं, बल्कि रेल यात्रियों की सुरक्षित यात्रा को भी खतरे में डालना हैI

इसलिए आवश्यक है कि सभी इन जायज माँगों के लिए इन कर्मचारियों का पुरजोर समर्थन करेंI

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