प्रेषक: रफीक शेख, मुंब्रा प्रवासी संघ
मुंबई के उपनगर, मुंब्रा और पूरे सेंट्रल लाइन के हजारों यात्रियों की ओर से, मैं रेलवे प्रशासन से एक सीधा और चुभता हुआ सवाल पूछना चाहता हूँ: मेगा ब्लॉक के खत्म होने के कुछ ही घंटों बाद ट्रेन पटरी से कैसे उतर जाती है?
हर रविवार, हम यात्री अपने समय, अपनी नौकरी और अपने परिवार की खुशियों का त्याग करते हैं। हम इस उम्मीद में ‘मेगा ब्लॉक’ की परेशानी झेलते हैं कि जिस ट्रैक पर हम सफर कर रहे हैं, वह सुरक्षित हो रहा है। हमें बताया जाता है कि ये ब्लॉक “अनिवार्य रखरखाव” और “तकनीकी सुधार” के लिए हैं। लेकिन बार-बार यह देखा गया है कि जैसे ही पहली ट्रेन पटरी पर दौड़ती है, ब्लॉक की सारी “सुरक्षा” धरी की धरी रह जाती है।
हमारी गंभीर चिंताएँ:
- जल्दबाजी का नतीजा: क्या ब्लॉक को समय पर खत्म करने के दबाव में इंजीनियरिंग के साथ समझौता किया जा रहा है? मेंटेनेंस के तुरंत बाद पटरी से उतरना यह दर्शाता है कि या तो ट्रैक का एलाइनमेंट (Alignment) ठीक नहीं था या गिट्टियों की पकड़ कमजोर थी।
- निरीक्षण की गुणवत्ता: ब्लॉक के बाद ट्रैक को “यात्रा के लिए फिट” कौन प्रमाणित करता है? यदि एक घंटे के भीतर हादसा होता है, तो यह प्रशासनिक और तकनीकी लापरवाही का स्पष्ट प्रमाण है।
- यात्रियों का मानसिक तनाव: हम सिर्फ समय नहीं गंवाते, हम अपना मानसिक सुकून भी खो देते हैं। अब पटरी पर लगने वाला हर मामूली झटका भी किसी बड़े हादसे का डर पैदा करता है।
हमारी मांग:
हमें “जांच समितियों” या “मुआवजे के वादों” की जरूरत नहीं है। हमें जवाबदेही (Accountability) चाहिए। यदि मेंटेनेंस के तुरंत बाद ट्रैक फेल होता है, तो उस काम के जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
मध्य रेलवे से अपील है: मेगा ब्लॉक को केवल एक रस्म (Ritual) समझना बंद करें और इसे एक जिम्मेदारी के रूप में लें। मुंब्रा और अन्य स्टेशनों के यात्री अपनी मेहनत की कमाई से टिकट खरीदते हैं—हमें अपनी जान से इसकी कीमत चुकाने पर मजबूर न करें।
रफीक शेख, मुंब्रा प्रवासी संघ
