नोएडा के मज़दूरों के जायज़ संघर्ष के समर्थन में एकजुट हों! 13 अप्रैल से गिरफ्तार किए गए सभी लोगों की तत्काल रिहाई की मांग करें!

कामगार एकता कमिटी का वक्तव्य, 19 अप्रैल, 2026

13 अप्रैल से, नोएडा की कई फैक्ट्रियों के लगभग 50,000 मज़दूर अपने बेहद कम वेतन और असहनीय काम की हालतों के विरोध में सड़कों पर उतर आए हैं। विरोध प्रदर्शन कर रहे मज़दूरों की मांगें पूरी तरह से जायज़ हैं। ये पूरे देश में करोड़ों मज़दूरों द्वारा झेले जा रहे भयानक शोषण और अमानवीय काम की हालतों को दर्शाती हैं। बस इंसान लायक हालतों की मांग करने के लिए, नोएडा के मज़दूरों पर किया गया क्रूर दमन बेहद नाजायज़ है। कामगार एकता कमिटी नोएडा में फैले आतंक की कड़ी निंदा करती है और 13 अप्रैल से गिरफ्तार किए गए सभी मजदूरों व यूनियन नेताओं की तत्काल रिहाई की मांग करती है।

13 अप्रैल से, नोएडा की कई फैक्ट्रियों के लगभग 50,000 मज़दूर अपने बेहद कम वेतन और असहनीय काम की हालतों के विरोध में सड़कों पर उतर आए हैं। वे मज़दूर बतौर अपने अधिकारों — 8 घंटे काम का दिन और इज्ज़त से जीवन जीने लायक वेतन — की मांग को लेकर बड़े साहस के साथ सड़कों पर उतरे हैं। ये विरोध प्रदर्शन तेजी से पूरे इलाके में, एक फैक्ट्री से दूसरे फैक्ट्री तक फैल गये। घरेलू कामगारों ने भी इज्ज़त से जीने लायक वेतन और काम की सम्मानजनक हालतों की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया।

13 अप्रैल की सुबह से ही, सैकड़ों मज़दूरों, महिलाओं और पुरुषों को पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा बेरहमी से पीटा गया है, जबकि कई सौ लोगों को कई दिनों तक जेल में बंद रखा गया है। उन्हें “तोड़फोड़ और आगजनी को उकसाने और उनमें शामिल होने” के आरोप पर जेल में बंद किया गया है।

ट्रेड यूनियन नेताओं को नजरबंद कर दिया गया है। राहगीरों को उठाकर पीटा गया और जेल में बंद कर दिया गया है। गर्भवती महिलाओं को भी नहीं बख्शा गया। मज़दूरों और उनके परिवारों के घरों की तलाशी ली जा रही है। गिरफ्तार मजदूरों के परिवारवालों को धमकाया जा रहा है, परेशान किया जा रहा है और उनके प्रियजनों के बारे में कोई भी जानकारी नहीं दी जा रही है। इन सभी कार्रवाइयों को “बाहरी तत्वों की साजिश” का पर्दाफाश करने के नाम पर जायज़ ठहराया जा रहा है।

कामगार एकता कमिटी नोएडा में फैले आतंक की कड़ी निंदा करती है और 13 अप्रैल से गिरफ्तार किए गए सभी मजदूरों व यूनियन नेताओं की तत्काल रिहाई की मांग करती है।

दिल्ली के उपनगर, तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में स्थित, नोएडा में 10,000 से अधिक औद्योगिक और सेवा इकाइयां हैं। ये आम तौर पर लघु इकाइयां हैं जिनमें प्रत्येक में 100 से कम मज़दूर काम करते हैं। ये मोबाइल फोन, अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान, ऑटो कंपोनेंट, आईटी सेवाएं, दवाइयाँ और रेडीमेड वस्त्र बनाती हैं। टीसीएस, एचसीएल, माइक्रोसॉफ्ट, सैमसंग, श्याओमी और बहुराष्ट्रीय वस्त्र ब्रांडों जैसी हिन्दोस्तानी  और विदेशी इजारेदार पूंजीवादी कंपनियां इन इकाइयों को काम आउटसोर्स करती हैं। अधिकांश काम निर्यात बाज़ार की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए होता है। यहां काम करने वाले मुख्य रूप से प्रवासी मज़दूर हैं, जिन्हें निजी ठेकेदार एजेंसियों के माध्यम से अस्थायी कॉन्ट्रैक्ट  पर काम पर रखा जाता है। इनमें लगभग 25 प्रतिशत मज़दूर महिलाएं हैं। ठेकेदार मज़दूरों को मिलने वाले बहुत कम वेतन का भी एक हिस्सा हथिया लेते हैं।

विरोध प्रदर्शन कर रहे मज़दूरों की सबसे पहली और प्रमुख मांग इज्ज़त से जीने लायक वेतन है। वे वर्तमान में प्रति माह 13,000 से 15,000 रुपये कमाते हैं, जिससे उनकी बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करना असंभव है। वे कम से कम 20,000 रुपये के न्यूनतम मासिक वेतन की मांग कर रहे हैं। यह याद रखा जाये कि पूरे एनसीआर क्षेत्र में सरकारी तौर पर घोषित न्यूनतम मासिक वेतन अकुशल मज़दूरों के लिए 20,000 रुपये से लेकर कुशल मज़दूरों के लिए 25,000 रुपये तक है।

मज़दूर आठ घंटे के काम के दिन, और नोएडा के अधिकांश हिस्सों में प्रचलित बारह घंटे की शिफ्टों को समाप्त करने की मांग कर रहे हैं। वे मानक वेतन से दोगुने दर पर ओवरटाइम भुगतान की मांग कर रहे हैं। वे समय पर वेतन और बोनस के भुगतान, वेतन बकाया और लंबित सेवानिवृत्ति भत्तों के तत्काल भुगतान की मांग कर रहे हैं। वे रोजीरोटी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, ठेका व्यवस्था को ख़त्म करने और नियमित रोज़गार की मांग कर रहे हैं। वे कार्यस्थल पर सख्त सुरक्षा मानकों तथा महिलाओं के उत्पीड़न व शोषण को रोकने के लिए प्रभावी तंत्र की मांग कर रहे हैं।

मज़दूरों के विरोध प्रदर्शनों के जवाब में, उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में अकुशल मज़दूरों के लिए 13,690 रुपये की वेतन वृद्धि की घोषणा की है, और कुशल मज़दूरों के लिए 16,868 रुपये की। यह मज़दूरों की मांग से बहुत कम है।

विरोध प्रदर्शन कर रहे मज़दूरों की मांगें पूरी तरह से जायज़ हैं। ये पूरे देश में करोड़ों मज़दूरों द्वारा झेले जा रहे भयानक शोषण और अमानवीय काम की हालतों को दर्शाती हैं।

बस इंसान लायक हालतों की मांग करने के लिए, नोएडा के मज़दूरों पर किया गया क्रूर दमन बेहद नाजायज़ है। ‘बाहरी साज़िश’ का आरोप पूरी तरह निराधार है, और इसका उद्देश्य मज़दूरों के जायज़ संघर्ष को बदनाम करना है।

कामगार एकता कमिटी देश के सम्पूर्ण मज़दूर वर्ग और सभी प्रगतिशील ताकतों से नोएडा के मज़दूरों के जायज़ संघर्ष के समर्थन में मज़बूती से खड़े होने का आह्वान करती है! आइए, पार्टी और यूनियन से सम्बंधित सभी मतभेदों को भुलाकर, 13 अप्रैल से गिरफ्तार किए गए सभी लोगों की रिहाई और उनके खिलाफ़ दर्ज सभी मामलों को वापस लेने की मांग करें!

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