मज़दूर एकता कमेटी के संवाददाता की रिपोर्ट
यह कंपनी टाटा मोटर्स, वोल्वो, एस्कॉर्ट्स, आयशर जैसे ऑटो कांनीयों के लिए पुर्जे बनाती है। कंपनी अपने उत्पादन का 40 से 50 प्रतिशत हिस्सा यूरोप जैसे अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में निर्यात करती है। ये बड़ी-बड़ी इजारेदार पूंजीवादी कपंनियां मोटर पार्ट्स को ठेका कंपनियों द्वारा, मज़दूरों को ठेके पर रखकर, बनवाती हैं और गुलामों जैसे काम करवाकर, ज्यादा से ज्यादा मुनाफ़ा कमाती हैं।

हरियाणा के फरीदाबाद सेक्टर-24 में स्थित साधू ओवरसीज़ कंपनी के मज़दूरों ने वेतन बढ़ोतरी के लिए, 5 मई को कंपनी के गेट पर प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारी मज़दूरों का कहना है कि वे पिछले कई सालों से कपंनी में काम कर रहे हैं। लेकिन उनको आज भी मात्र 10,500 रुपये प्रति माह वेतन दिया जा रहा है। जबकि महंगाई दिन-ब-दिन बढ़ रही है, वे किराये के मकान में रहते हैं, उनके बच्चे स्कूलों में पढ़ते हैं, रोज़मर्रा के ख़र्च बढ़ रहे हैं, वे ओवर टाइम में भी काम करते हैं लेकिन उनके घर का ख़र्च पूरा नहीं होता है। मज़दूरों के लिए इतने कम वेतन पर परिवार चलाना बहुत ही मुश्किल हो गया है।
मज़दूरों ने आरोप लगाया कि उन्होंने वेतन वृद्धि को लेकर कई बार ठेकेदार से बात की है लेकिन ठेकेदार का कहना है कि जब तक कंपनी वेतन नहीं बढ़ायेगी तब तक वह वेतन नहीं बढ़ा सकता। जब कंपनी के मज़दूर मजबूर होकर कंपनी के गेट पर प्रदर्शन करने लगे, तो कंपनी के प्रबंधन ने मज़दूरों को वेतन वृद्धि करने का आश्वासन दिया और तब मज़दूर काम पर वापस लौटे।
साधू ओवरसीज़ फोर्जिंग कंपनी ट्रांसमिशन गियर, शाफ्ट और ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स, इंजन कनेक्टिंग रॉड, एटीवी पार्ट्स आदि का उत्पादन करती है। यह कंपनी टाटा मोटर्स, वोल्वो, एस्कॉर्ट्स, आयशर और रेलवे के पुर्जे बनाती है। कंपनी अपने उत्पादन का 40 से 50 प्रतिशत हिस्सा यूरोप जैसे अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में निर्यात करती है।
टाटा मोटर्स, वोल्वो, एस्कॉर्ट्स, आयशर – ये देशी-विदेशी बड़ी-बड़ी इजारेदार पूंजीवादी कंपनियां हैं, जो मोटर पार्ट्स को ठेका कंपनियों द्वारा, मज़दूरों को ठेके पर रखकर, बनवाती हैं। इन ठेका मज़दूरों को मात्र 10,500 रुपये वेतन दिया जाता है। कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं दी जाती है। यदि टाटा, वोल्वो, एस्कॉर्ट्स और आयशर अपने प्लांट में ये मोटर्स पार्ट्स बनावायेंगी तो इसके लिये मज़दूरों को कम से कम 50 हजार से 60 हजार रुपये रुपए महीना वेतन देना पड़ेगा। ये बड़ी-बड़ी इजारेदार पूंजीवादी कपंनियां मज़दूरों को ठेके पर रखकर, गुलामों जैसे काम करवाकर, ज्यादा से ज्यादा मुनाफ़ा कमाती हैं।
