महिला संगठनों ने महिलाओं और लड़कियों पर बढ़ते हमलों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया

मजदूर एकता कमेटी संवाददाता की रिपोर्ट

दिल्ली-NCR क्षेत्र की महिला संगठनों ने 18 मई को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किया, जिसमें महिलाओं और बालिकाओं के खिलाफ बढ़ते यौन हमलों और अपराधों के प्रति अपना आक्रोश व्यक्त किया गया। दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में छात्र, कामकाजी महिलाएं और पुरुष, राजनीतिक कार्यकर्ता और ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता शामिल हुए।

यह विरोध प्रदर्शन ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक वूमेन्स एसोसिएशन (AIDWA), ऑल इंडिया महिला सांस्कृतिक संगठन (AIMSS), ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव वूमेन्स एसोसिएशन (AIPWA), सेंटर फॉर स्ट्रग्ग्लिंग वूमेन्स (CSW), जिम्मेदारी सोशल वेलफेयर आर्गेनाईजेशन (J-SWO), नेशनल फेडरेशन ऑफ़ इंडियन वूमेन (NFIW), प्रगतिशील महिला संगठन और पुरोगामी महिला संगठन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था। CITU, AIUTUC, ANHAD और अन्य संगठनों के कार्यकर्ताओं ने भी इसमें भाग लिया।

प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में लगे एक विशाल बैनर पर बड़े अक्षरों में लिखा था – ‘महिलाओं और बालिकाओं पर बढ़ते यौन अपराधों और हिंसा के खिलाफ आक्रोश व्यक्त करें’।

प्रतिभागियों ने तख्तियां और बैनर ले रखे थे जिन पर नारे लिखे थे – “महिलाओं और बालिकाओं के खिलाफ बढ़ते यौन अपराध मुर्दाबाद!”, “महिलाओं के खिलाफ बलात्कार और हिंसा की इस संस्कृति का अंत करो!”, “अधिकारियों को जवाब देना होगा!”, “दोषियों को कड़ी सजा सुनिश्चित करो!”, इत्यादि। उन्होंने जुझारू नारे लगाते हुए केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और देश भर की सरकारों से स्कूलों और कॉलेजों, सार्वजनिक परिवहन या कार्यस्थलों में महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में उनकी विफलता के लिए जवाब मांगा।

भाग लेने वाले संगठनों के प्रतिनिधियों ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया। उन्होंने दिल्ली के एक स्कूल में बच्ची के साथ बलात्कार और रात में स्लीपर बस में कामकाजी महिला के साथ हुए सामूहिक बलात्कार जैसी हालिया घटनाओं का हवाला देते हुए बताया कि लड़कियों और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपाय पूरी तरह से नदारद हैं। पुलिस की उदासीनता, एफआईआर दर्ज करने से इनकार करना और पीड़िता को ही अपराध के लिए दोषी ठहराना – ये सब आम बात हो गई है। 2012 के निर्भया कांड के बाद हमने नागरिकों के लिए जो नियम और दिशानिर्देश स्थापित करने के लिए संघर्ष किया, उन्हें खुलेआम नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों से पीड़ितों के प्रति संवेदनशील प्रतिक्रिया और न केवल अपराधियों के खिलाफ बल्कि प्रक्रिया में देरी करने या पीड़ितों को डराने-धमकाने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की मांग की।

एक संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में, भाग लेने वाले संगठनों ने दिल्ली सरकार, पुलिस और न्यायपालिका से जवाबदेही की मांग की; सभी स्कूलों में सरकार द्वारा बाल सुरक्षा उपायों का ऑडिट करने की मांग की; उचित स्ट्रीट लाइटिंग और क्रेच/डे केयर सुविधाओं जैसी बुनियादी ढांचागत सुविधाओं की मांग की; महिलाओं के लिए मुफ्त और सुरक्षित चौबीसों घंटे बस सेवा की मांग की; POSH अधिनियम के अनुसार सभी कार्यस्थलों में महिला सुरक्षा समितियों की स्थापना की मांग की; और सभी कामकाजी महिलाओं के लिए सम्मानजनक वेतन और रोजगार की गारंटी की मांग की।

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