नूंह, हरियाणा में पावर इंजीनियरों, बिजली कर्मचारियों, संयुक्त किसान मोर्चा एवं उपभोक्ताओं की विशाल रैली ने समानांतर वितरण लाइसेंस आवेदन निरस्त करने की मांग की

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (AIPEF) की प्रेस विज्ञप्ति

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (AIPEF)

प्रेस विज्ञप्ति

21 जुलाई, 2026

नूंह में पावर इंजीनियरों, बिजली कर्मचारियों, संयुक्त किसान मोर्चा एवं उपभोक्ताओं की विशाल रैली ने समानांतर वितरण लाइसेंस आवेदन निरस्त करने की मांग की

नूंह/चंडीगढ़

हरियाणा के नूंह में आज पावर इंजीनियरों, बिजली कर्मचारियों, संयुक्त किसान मोर्चा के प्रतिनिधियों तथा बिजली उपभोक्ताओं की एक विशाल संयुक्त रैली आयोजित की गई, जिसमें राज्य में प्रस्तावित समानांतर वितरण (पैरेलल डिस्ट्रीब्यूशन) लाइसेंस का जोरदार विरोध किया गया।

रैली को मुख्य रूप से ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (AIPEF) के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे, ईईएफआई के उपाध्यक्ष सुभाष लाम्बा, हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के महासचिव रविन्द्र घंघास, कर्मचारी नेता सुरेश राठी, संयुक्त किसान मोर्चा के नेता योगेन्द्र नैन तथा अन्य नेताओं ने संबोधित किया।

हजारों प्रतिभागियों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर कहा कि निजी कंपनियों को समानांतर वितरण लाइसेंस दिए जाने से सार्वजनिक विद्युत वितरण व्यवस्था कमजोर होगी, आम उपभोक्ताओं पर बिजली दरों का बोझ बढ़ेगा, क्रॉस-सब्सिडी व्यवस्था समाप्त होगी तथा अंततः बिजली क्षेत्र के निजीकरण का मार्ग प्रशस्त होगा।

रैली के उपरांत हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) को एक ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें समानांतर वितरण लाइसेंस के आवेदन को तत्काल निरस्त करने की मांग की गई। ज्ञापन में आयोग द्वारा गठित तथाकथित विशेषज्ञ समिति को भी तत्काल भंग करने की मांग की गई। ज्ञापन में कहा गया कि यह समिति मनमाने एवं असंवैधानिक तरीके से गठित की गई है तथा इस महत्वपूर्ण सार्वजनिक मामले में निष्पक्ष निर्णय लेने की आवश्यक विश्वसनीयता और निष्पक्षता से वंचित है।

सभा को संबोधित करते हुए AIPEF के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि यदि निजी कंपनियों को सार्वजनिक वितरण नेटवर्क का उपयोग करते हुए केवल लाभकारी उपभोक्ताओं को चुनने की अनुमति दी गई तो इससे राज्य के सार्वजनिक वितरण निगम आर्थिक रूप से कमजोर हो जाएंगे और किसानों, घरेलू उपभोक्ताओं तथा छोटे व्यावसायिक उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि बिजली एक अनिवार्य सार्वजनिक सेवा है, इसे निजी लाभ कमाने का माध्यम नहीं बनाया जा सकता। AIPEF ने दोहराया कि विद्युत अधिनियम किसी भी उपभोक्ता के साथ भेदभाव की अनुमति नहीं देता तथा सार्वजनिक वितरण नेटवर्क पर एकाधिक वितरण लाइसेंसधारियों की व्यवस्था सार्वभौमिक एवं समान विद्युत आपूर्ति के सिद्धांतों के विपरीत है।

रैली में पावर इंजीनियरों, बिजली कर्मचारियों, संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े किसान संगठनों, उपभोक्ता प्रतिनिधियों तथा विभिन्न ट्रेड यूनियनों ने बड़ी संख्या में भाग लिया और चेतावनी दी कि यदि जनहित की इन मांगों की अनदेखी की गई तो आंदोलन को और व्यापक एवं तीव्र किया जाएगा।

AIPEF ने HERC से पारदर्शिता, निष्पक्षता एवं व्यापक जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए समानांतर वितरण लाइसेंस के आवेदन को निरस्त करने तथा असंवैधानिक रूप से गठित विशेषज्ञ समिति को तत्काल भंग करने की मांग की। फेडरेशन ने पुनः दोहराया कि वह सार्वजनिक विद्युत क्षेत्र की रक्षा तथा सभी उपभोक्ताओं को सस्ती, विश्वसनीय एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराने के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगा।

शैलेन्द्र दुबे

चेयरमैन

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